
टीकमगढ़. मध्यप्रदेश के टीकमगढ़ रेलवे स्टेशन पर देर रात एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत करीब दो महीने पहले लगाई गई लिफ्ट अचानक नीचे गिर गई। घटना के समय लिफ्ट में छह से अधिक यात्री मौजूद बताए जा रहे हैं। लिफ्ट के अचानक नीचे आने से यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। हादसे में कुछ यात्रियों को मामूली चोटें आने की जानकारी सामने आई है।
घटना प्लेटफॉर्म नंबर-2 पर बनी लिफ्ट में हुई। बताया जा रहा है कि यात्री प्लेटफॉर्म-2 से प्लेटफॉर्म-1 की ओर जाने के लिए लिफ्ट में सवार हुए थे। लिफ्ट ऊपर जाने के दौरान अचानक करीब पांच फीट नीचे आ गिरी। हालांकि नीचे लगे बफर स्प्रिंग में लिफ्ट लगभग एक फीट नीचे जाकर रुक गई। इस वजह से बड़ा हादसा टल गया।
हादसे के दौरान लिफ्ट में मौजूद यात्रियों में घबराहट की स्थिति बन गई। यात्रियों प्रियम जैन, संदीप यादव, अभिषेक यादव और मनोज कुमार के मुताबिक, लिफ्ट के अचानक नीचे गिरने के बाद कुछ देर तक लोग अंदर ही फंसे रहे। बाद में उन्हें बाहर निकाला गया। यात्रियों ने घटना के बाद स्टेशन पर उपलब्ध लिफ्ट की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए हैं।
टीकमगढ़ रेलवे स्टेशन का विकास अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत करीब 13 करोड़ रुपए की लागत से किया गया है। स्टेशन पर कराए गए विकास कार्यों का वर्चुअल लोकार्पण 17 जुलाई को प्रधानमंत्री द्वारा किया गया था। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी शामिल हुए थे। ऐसे में नई लिफ्ट में कुछ ही समय बाद सामने आई इस तकनीकी घटना ने निर्माण और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
लिफ्ट की क्षमता 13 यात्रियों या अधिकतम 884 किलोग्राम वजन बताई गई है। घटना के बाद ललितपुर से सीनियर सेक्शन इंजीनियर पुरुषोत्तम मीणा जांच के लिए टीकमगढ़ पहुंचे। उन्होंने प्रारंभिक तौर पर बताया कि लिफ्ट के नीचे आने की वजह क्षमता से अधिक वजन होना सामने आया है। हालांकि यात्रियों का कहना है कि लिफ्ट में छह से ज्यादा लोग ही मौजूद थे।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि ओवरलोड की स्थिति में चेतावनी देने वाला सेंसर अलार्म काम नहीं कर रहा था। यह सुरक्षा व्यवस्था लिफ्ट में निर्धारित क्षमता से अधिक भार होने पर यात्रियों को अलर्ट करने के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। घटना के बाद लिफ्ट की जांच और मरम्मत कर उसे दोबारा चालू कर दिया गया है।
हादसे के बाद यात्रियों ने लिफ्ट की क्षमता, ओवरलोड सेंसर, ब्रेकिंग सिस्टम और अन्य सुरक्षा उपकरणों की विस्तृत तकनीकी जांच कराने की मांग की है। यात्रियों का कहना है कि नई लिफ्ट में इतनी जल्दी तकनीकी समस्या सामने आना गंभीर विषय है। साथ ही निर्माण और स्थापना से जुड़ी एजेंसी की जिम्मेदारी तय कर आवश्यक कार्रवाई किए जाने की मांग भी उठी है।
फिलहाल रेलवे की ओर से लिफ्ट की तकनीकी स्थिति की जांच की जा रही है। हादसे के वास्तविक कारण और सुरक्षा उपकरणों की भूमिका को लेकर विस्तृत जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
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