
नई दिल्ली। मध्य पूर्व तनाव और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर वैश्विक चिंता के बीच भारतीय ध्वज वाला एलपीजी पोत ‘ग्रीन आशा’ 15,400 टन गैस लेकर सुरक्षित मुंबई पहुंच गया है। यह युद्ध शुरू होने के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर मुंबई पहुंचने वाला पहला भारतीय पोत बन गया है।
‘ग्रीन आशा’ नवी मुंबई स्थित जवाहरलाल नेहरू पत्तन प्राधिकरण (JNPA) के लिक्विड बर्थ पर लंगर डाला गया, जहां उसका स्वागत किया गया। जेएनपीए के अनुसार, पोत ने होर्मुज जलडमरूमध्य को सफलतापूर्वक पार किया और बीपीसीएल-आईओसीएल द्वारा संचालित टर्मिनल पर सुरक्षित पहुंचा।
अधिकारियों ने बताया कि पोत, उस पर मौजूद पूरा माल और चालक दल के सभी सदस्य पूरी तरह सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा कि यह आगमन जटिल भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बावजूद भारत की समुद्री आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती और दक्षता को दर्शाता है।
गौरतलब है कि ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच घोषित दो सप्ताह के युद्धविराम के बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को आंशिक रूप से खोलने की घोषणा की थी। इसके बाद यह पहला प्रमुख भारतीय ऊर्जा पोत है जो इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से होकर भारत पहुंचा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ‘ग्रीन आशा’ का सुरक्षित आगमन भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए सकारात्मक संकेत है और आने वाले दिनों में इस मार्ग से अन्य ऊर्जा पोतों के भी भारत पहुंचने की संभावना बढ़ गई है।
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