
आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में एक छोटे सैलून संचालक को 72 लाख रुपये के जीएसटी बकाया का नोटिस मिलने से हड़कंप मच गया है। हैरानी की बात यह है कि संबंधित व्यक्ति का दावा है कि वह पिछले 40 वर्षों से केवल एक छोटी नाई की दुकान चलाकर जीवनयापन कर रहा है और उसका किसी बड़े कारोबार से कोई संबंध नहीं है।
पीड़ित श्रीनिवास राव, जो विजयवाड़ा के पंजा सेंटर इलाके में सैलून चलाते हैं, को जीएसटी अधिकारियों ने लाखों रुपये के टैक्स भुगतान का नोटिस भेजा है। साथ ही उनका बैंक खाता भी फ्रीज कर दिया गया है।
राव के अनुसार, यह परेशानी पहली बार मई 2021 में सामने आई जब वे सरकारी वेलफेयर योजना के लिए आवेदन करने पहुंचे। ऑनलाइन सत्यापन के दौरान अधिकारियों ने बताया कि उनके नाम पर विशाखापत्तनम में एक व्यवसाय पंजीकृत है और वे जीएसटी का भुगतान कर रहे हैं, जिसके कारण वे योजना के लिए अयोग्य हैं।
श्रीनिवास राव ने बताया कि उन्होंने कभी किसी व्यवसाय के लिए जीएसटी रजिस्ट्रेशन नहीं कराया। इसके बावजूद 2022 में उन्हें फिर टैक्स बकाया का नोटिस मिला। उन्होंने कई बार जीएसटी कार्यालय और पुलिस अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हुआ।
हाल ही में फरवरी में उन्हें जानकारी मिली कि बैंक ऑफ महाराष्ट्र में उनका खाता जीएसटी विभाग के निर्देश पर फ्रीज कर दिया गया है। इसके बाद उन्हें 72 लाख रुपये के भुगतान की मांग वाला नोटिस भी मिला।
प्राथमिक आशंका है कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने श्रीनिवास राव के आधार और पैन कार्ड का दुरुपयोग कर उनके नाम पर फर्जी जीएसटी पंजीकरण कराया और विशाखापत्तनम में बड़े पैमाने पर कारोबार कर टैक्स चोरी की। अब पीड़ित न्याय और राहत की मांग कर रहा है।
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