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बड़वानी में 'मिशन डी-3' का बड़ा असर: 105 गांवों के पटेल, पुजारा और सरपंचों ने ली बिना डीजे, दारू और दहेज के शादी की शपथ


बड़वानी. मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले में सामाजिक कुरीतियों को जड़ से खत्म करने के लिए पुलिस प्रशासन द्वारा चलाया जा रहा 'मिशन डी-3' (Mission D-3) अब एक बड़े जन-आंदोलन का रूप लेता जा रहा है। 'बिना डीजे, बिना दारू और बिना दहेज' (No DJ, No Alcohol, No Dowry) के इस सकारात्मक अभियान का व्यापक असर अब ग्रामीण अंचलों में साफ तौर पर दिखने लगा है।

शनिवार को सिलावद मंडी प्रांगण में एक ऐतिहासिक और वृहद बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में थाना सिलावद, पलसूद और पाटी क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले 105 गांवों के पारंपरिक पटेल, पुजारा, सरपंच व समाज प्रमुखों ने हिस्सा लिया और सामूहिक रूप से समाज को एक नई दिशा देने का संकल्प लिया।

कुरीतियों के खिलाफ जनजातीय समाज का ऐतिहासिक संकल्प

बड़वानी एसपी (SP) पद्मविलोचन शुक्ल की प्रेरणा से आयोजित इस चौपाल व बैठक में बड़ी संख्या में जनजातीय समाज के प्रतिनिधियों और प्रबुद्धजनों ने शिरकत की। समाज प्रमुखों ने एक सुर में स्वीकार किया कि शादियों में डीजे का बढ़ता शोर, शराब का अत्यधिक चलन और दहेज प्रथा जैसी कुरीतियां समाज को आर्थिक और मानसिक रूप से खोखला कर रही हैं।

आने वाली पीढ़ी को एक बेहतर और स्वस्थ सामाजिक वातावरण देने के उद्देश्य से सभी 105 गांवों के प्रमुखों ने हाथ उठाकर शपथ ली कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में अब पूरी तरह से बिना डीजे, बिना दारू और बिना दहेज के विवाह संपन्न कराएंगे और इसका उल्लंघन करने वालों पर सामाजिक रूप से कड़ा रुख अपनाएंगे।

पुलिस ने दी सुरक्षा, साइबर क्राइम और यातायात की सीख

कार्यक्रम में सिलावद थाना प्रभारी निरीक्षक रामकृष्ण लववंशी, सहायक उपनिरीक्षक विनोद मीणा, हेमराज वर्मा सहित भारी संख्या में पुलिस बल मौजूद रहा। पुलिस अधिकारियों ने ग्रामीणों और समाज प्रमुखों के इस साहसिक निर्णय की मुक्तकंठ से सराहना की और इसे ग्रामीण विकास के लिए एक मील का पत्थर बताया।

सामाजिक सुधार की इस बैठक के साथ-साथ पुलिस ने ग्रामीणों के लिए एक विशेष जागरूकता सत्र भी चलाया, जिसमें महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं:

  • यातायात सुरक्षा: ग्रामीणों को अनिवार्य रूप से हेलमेट पहनने और किसी भी हाल में शराब पीकर वाहन न चलाने (डोंट ड्रिंक एंड ड्राइव) की समझाइश दी गई।

  • महिला व बाल संरक्षण: महिलाओं और बालिकाओं के विरुद्ध होने वाले अपराधों पर रोक लगाने तथा किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में तुरंत 'डायल-112' या स्थानीय पुलिस को सूचित करने के लिए प्रेरित किया गया।

  • साइबर अपराध से बचाव: आज के डिजिटल युग में हो रही ऑनलाइन ठगी से बचने के लिए ग्रामीणों को सचेत किया गया कि वे कभी भी अनजान व्यक्ति के साथ अपना ओटीपी (OTP), पासवर्ड या बैंकिंग जानकारी साझा न करें।

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