
सिवनी जिले के कुरई थाना क्षेत्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष की एक हृदयविदारक घटना सामने आई है। सोमवार दोपहर करीब 12 बजे जंगल से लगे राजस्व क्षेत्र में मवेशी चराने गए 62 वर्षीय बुजुर्ग पर झाड़ियों में घात लगाए बैठे बाघ ने अचानक जानलेवा हमला कर दिया। हमले में गंभीर रूप से घायल बुजुर्ग की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। घटना के बाद से ही समूचे सीमावर्ती ग्रामीण अंचल में भारी दहशत और सनसनी का माहौल व्याप्त है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सिवानकन्हार ग्राम पंचायत अंतर्गत आने वाले ग्राम रमपुरी निवासी सुम्मर लाल (उम्र 62 वर्ष) सोमवार दोपहर अपने मवेशियों को लेकर पिंडरई बीट क्षेत्र की ओर गए थे। प्रत्यक्षदर्शियों और वन अमले के मुताबिक, वे पिंडरई बीट के कक्ष क्रमांक P358 से सटे राजस्व क्षेत्र में मवेशी चरा रहे थे। इसी दौरान जंगल की ओर से निकले एक आदमखोर बाघ ने अचानक उन पर झपट्टा मार दिया। बाघ के अचानक और भीषण हमले से वृद्ध को संभलने का तनिक भी मौका नहीं मिला और उन्होंने मौके पर ही दम तोड़ दिया।
घटना की जानकारी मिलते ही आसपास मौजूद ग्रामीणों ने शोर मचाया और मामले की सूचना तत्काल कुरई थाना पुलिस तथा वन परिक्षेत्र के अधिकारियों को दी। सूचना मिलते ही पुलिस बल और वन विभाग की संयुक्त टीम घटनास्थल पर पहुंची। पुलिस ने शव का पंचनामा तैयार कर उसे पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया। वहीं वन विभाग के अधिकारियों ने मौके से बाघ के पगचिह्न (पगमार्क) ट्रेस किए और आसपास के वन क्षेत्र का बारीकी से निरीक्षण कर जांच शुरू कर दी है।
इस दुखद घटना के बाद वन विभाग ने शासन के निर्धारित नियमों के तहत त्वरित कार्रवाई करते हुए मृतक के पीड़ित परिवार को 8 लाख रुपये की आर्थिक सहायता राशि स्वीकृत की है। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि कागजी औपचारिकताएं पूर्ण कर शीघ्र ही मुआवजा राशि परिजनों के बैंक खाते में हस्तांतरित कर दी जाएगी।
बाघ के इस घातक हमले के बाद वन विभाग ने आसपास के तमाम गांवों में अलर्ट जारी करते हुए ग्रामीणों से अत्यधिक सतर्कता बरतने की अपील की है। विभाग ने मुनादी कराकर ग्रामीणों को हिदायत दी है कि वे जंगल और उससे लगे संवेदनशील सीमांत क्षेत्रों में मवेशी चराने अकेले बिल्कुल न जाएं। किसी आवश्यक कार्यवश यदि जाना भी पड़े, तो हमेशा समूह में रहें और सतर्कता बरतें। वन विभाग ने पिंडरई बीट और आसपास के राजस्व क्षेत्रों में ट्रैप कैमरे लगाने के साथ-साथ मैदानी अमले की 24 घंटे गश्त बढ़ा दी है, ताकि बाघ की हलचल पर नजर रखी जा सके और अन्य ग्रामीणों को सुरक्षित किया जा सके।
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