
सतना, देशबन्धु. रेलवे स्टेशन क्षेत्र में यातायात व्यवस्था सुधारने के उद्देश्य से यातायात पुलिस द्वारा कार्य योजना तैयार की जा रही है. इस संबंध में यातायात थाना प्रभारी सूबेदार रामदेवी राय ने गुरूवार को रेलवे स्टेशन प्रबंधक ए. मतीन से चर्चा की. इस दौरान राजकीय रेल पुलिस एवं रेल सुरक्षा बल के अधिकारी कर्मचारी भी मौजूद रहे. ऐसी खबर है कि भोपाल जाने वाली रेवांचल एक्सप्रेस के समय सूबे के एक बड़े नेता का काफिला जाम में फंसने के बाद कप्तान तक बात पहुंची.
तब जाकर ट्रैफिक पुलिस रेल परिसर में तेजी से सक्रिय हुई. स्टेशन प्रबंधक ने यातायात थाना प्रभारी को बताया कि स्टेशन परिसर में थ्री व्हीलर ऑटो रिक्शा का संचालन अव्यवस्थित तरीके से हो रहा है, जिस कारण स्टेशन के मुख्य मार्ग में जाम की स्थिति निर्मित होती है. पार्किंग के लिए निर्धारित स्थान होने के बावजूद सड़क पर ऑटो रिक्शा खड़े किए जाते हैं, जिससे किसी भी रेलगाड़ी के आने के समय सड़क में यातायात का दबाव बढ़ता है और स्टेशन आने जाने वाले लोगों को सड़क पर चलने में दिक्कत होती है.
स्टेशन प्रबंधन और जीआरपी के अधिकारियों कर्मचारियों से चर्चा करने के बाद यातायात थाना प्रभारी सूबेदार रामदेवी राय ने ऑटो रिक्शा चालक संगठन के पदाधिकारियों से चर्चा करते हुए व्यवस्था बनाए जाने की बात कही. उन्होंने समझाइश दी कि ऑटो रिक्शा निर्धारित पार्किंग स्थान में ही खड़े किए जाएं, इन्हें सड़क पर लाकर अनावश्यक जाम की स्थिति निर्मित न की जाए.
ऑटो चालकों ने मढ़ा दोष
ऑटो चालक संगठन के लोग इसमें अपनी सहमति जताने की बजाय बैटरी रिक्शा वालों पर दोष मढऩे लगे कि अव्यवस्था उनके द्वारा फैलाई जा रही है. इसके अलावा संगठन के लोगों ने कहा कि जहां ऑटो पार्किंग निर्धारित है वहां बस वालों का कब्जा रहता है, इसलिए ऑटो रिक्शा निर्धारित स्थान पर नहीं खड़े हो पाते.
नियम कायदों की धज्जी उड़ रही
गौरतलब है कि शहर में चलने वाले ऑटो रिक्शा खुलेआम नियम कायदों की धज्जी उड़ा रहे हैं. क्षमता और स्वीकृति से अधिक सवारी ढोना इनकी आदत में शुमार हो चुका है. सड़क पर चलते- चलते यह कब अचानक ब्रेक लगा दें और पीछे वाला वाहन इनसे टकराकर गिर जाए किसी को पता नहीं होता. सड़क पर चलते-चलते बगैर इंडिकेटर दिए यह कहीं भी कभी भी मुड़ जाते हैं, जिसके कारण दूसरे वाहन चालक दुर्घटना का शिकार बनते हैं. इनकी मनमानी ने रेलवे स्टेशन क्षेत्र में भी भारी अव्यवस्था फैला रखी है.
सवाल यह हो रहा है कि क्या कभी इनकी आदतों में बदलाव लाया जा सकेगा. सवाल यह है कि जब परिवहन विभाग ने ऑटो रिक्शा की क्षमता निर्धारित कर रखी है तो क्या सख्ती के साथ ओवरलोडिंग पर रोक लगाई जा सकेगी. या फिर नियम कायदों को तोड़कर सड़क पर चलने वाले ऑटो रिक्शा दुर्घटनाओं को न्योता देते रहेंगे.
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