Office Address

Address Display Here

Phone Number

+91-9876543210

Email Address

info@deshbandhu.co.in

प्रधानमंत्री मोदी की पुस्तक कूटनीति से विश्व पटल पर पहुंचेगी भारतीय ज्ञान परंपरा: व्योमेश शुक्ला


वाराणसी, 19 जून (आईएएनएस)। हिंदी के प्रतिष्ठित कवि एवं नागरी प्रचारिणी सभा के प्रमुख व्योमेश शुक्ला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्लोवाकिया संसद के स्पीकर को चरक संहिता और सुश्रुत संहिता भेंट किए जाने को भारतीय ज्ञान परंपरा के वैश्विक प्रसार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह पहल केवल कूटनीतिक शिष्टाचार नहीं, बल्कि भारत की ज्ञानात्मक और सांस्कृतिक कूटनीति का सशक्त उदाहरण है।

वाराणसी, 19 जून (आईएएनएस)। हिंदी के प्रतिष्ठित कवि एवं नागरी प्रचारिणी सभा के प्रमुख व्योमेश शुक्ला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्लोवाकिया संसद के स्पीकर को चरक संहिता और सुश्रुत संहिता भेंट किए जाने को भारतीय ज्ञान परंपरा के वैश्विक प्रसार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह पहल केवल कूटनीतिक शिष्टाचार नहीं, बल्कि भारत की ज्ञानात्मक और सांस्कृतिक कूटनीति का सशक्त उदाहरण है।

व्योमेश शुक्ला ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा कि चरक भारतीय चिकित्सा विज्ञान के प्रथम पुरुष माने जाते हैं, जबकि सुश्रुत को शल्य चिकित्सा का जनक माना जाता है। ऐसे ग्रंथों का विश्व मंच पर आदान-प्रदान भारत की प्राचीन विद्या, संस्कृति और बौद्धिक परंपरा के महत्व को रेखांकित करता है।

उन्होंने कहा कि तकनीक के इस युग में पुस्तकें जीवन के केंद्र से दूर होती जा रही हैं, ऐसे समय में पुस्तकों को उपहार स्वरूप देने और प्राप्त करने की परंपरा को पुनर्जीवित करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री मोदी की इस पहल से भारतीय भाषाओं, साहित्य और प्राचीन ग्रंथों की विदेशी भाषाओं में अनुवाद को बढ़ावा मिलेगा तथा भारत की ज्ञान-संपदा विश्व के अधिकाधिक लोगों तक पहुंचेगी।

उन्होंने कहा कि वैदिक वाङ्मय, आयुर्वेद, नाट्यशास्त्र, संगीत और अन्य भारतीय विद्याओं का विशाल भंडार पुस्तकों में सुरक्षित है, जिन्हें केवल संरक्षित रखना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि उन्हें पढ़ना, समझना और दुनिया तक पहुंचाना भी जरूरी है।

व्योमेश शुक्ला ने कहा कि भारत के पास विश्व को देने के लिए बहुत कुछ है और हमारे प्राचीन ग्रंथ उसी ज्ञान के जीवंत प्रमाण हैं। पुस्तकों का यह आदान-प्रदान भारतीय अतिथि-सत्कार, सांस्कृतिक सौहार्द और ज्ञान-आधारित कूटनीति को नई मजबूती प्रदान करेगा।

--आईएएनएस

एएसएच/डीकेपी

Share:

Leave A Reviews

Related News