नई दिल्ली, 8 अक्टूबर (आईएएनएस)। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 के कथित दुरुपयोग को लेकर भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि उनके पास इस संबंध में जानकारी और रिकॉर्ड मौजूद हैं, जिन्हें वह कांग्रेस आलाकमान को सौंपेंगे और पूरे मामले की विस्तृत जांच कराएंगे।
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नई दिल्ली, 8 अक्टूबर (आईएएनएस)। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 के कथित दुरुपयोग को लेकर भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि उनके पास इस संबंध में जानकारी और रिकॉर्ड मौजूद हैं, जिन्हें वह कांग्रेस आलाकमान को सौंपेंगे और पूरे मामले की विस्तृत जांच कराएंगे।
दिल्ली में मीडिया से बातचीत में शिवकुमार ने आरोप लगाया कि भाजपा के कुछ नेता फर्जी तरीके से फॉर्म-7 आवेदन दाखिल कर मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश में शामिल थे। उन्होंने दावा किया कि हाल ही में राज्यपाल से मुलाकात करने वाले भाजपा नेताओं में से कुछ का भी इस कथित गड़बड़ी से संबंध है। मुख्यमंत्री ने कथित तौर पर फर्जी फॉर्म-7 आवेदन भी दिखाए और दावा किया कि उनके पास ऐसे आवेदनों की एक पूरी बोरी है, जिन्हें भाजपा मुख्यालय में छपवाया गया था।
शिवकुमार ने कहा, "मेरे पास जानकारी और रिकॉर्ड हैं। मैं इसे उजागर करूंगा और सारी जानकारी आलाकमान को सौंपूंगा। भाजपा नेता बिना किसी शर्म के बेहद घटिया और आपराधिक काम कर रहे हैं।"
उन्होंने सवाल उठाया कि विपक्षी नेता कथित फॉर्म-7 दुरुपयोग की जांच का विरोध क्यों कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी गड़बड़ी की आशंका नहीं है तो जांच से डरने की जरूरत नहीं होनी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा, "उन्हें डर है कि उनके नाम सामने आ जाएंगे और इसलिए वे कह रहे हैं कि किसी जांच की जरूरत नहीं है। मैं इस मामले की जांच कराऊंगा।"
शिवकुमार ने कहा कि गरीब ग्रामीणों और अशिक्षित लोगों से फॉर्म-7 की जटिल प्रक्रिया को समझकर बड़ी संख्या में आवेदन तैयार करने की उम्मीद नहीं की जा सकती। उन्होंने आरोप लगाया कि बेंगलुरु से शुरू हुआ फॉर्म-7 के कथित दुरुपयोग का मामला बाद में पूरे कर्नाटक में फैल गया।
उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए हैं कि बेघर और वंचित लोगों के नाम भी मतदाता सूची से बाहर न हों। उन्होंने कहा कि सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि ऐसे लोगों को अपनी जानकारी में सुधार करने और मतदाता सूची में नाम सुनिश्चित कराने के लिए एक महीने का समय दिया जाए।
मुख्यमंत्री ने भाजपा नेताओं के राज्यपाल से मुलाकात करने और कथित फर्जी फॉर्म-7 आवेदन दाखिल करने वालों के खिलाफ दर्ज मामलों पर सवाल उठाए जाने की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि अगर किसी व्यक्ति का नाम गलत तरीके से मतदाता सूची से हटाने की कोशिश की जा रही है तो क्या सरकार कार्रवाई नहीं करेगी।
उन्होंने कहा, "क्या यह अपराध नहीं है? क्या यह मुख्यमंत्री का कर्तव्य नहीं है कि वह हर व्यक्ति के वोट की रक्षा करे?"
शिवकुमार ने कहा कि सरकार किसी भी राजनीतिक दल के समर्थक के मताधिकार की रक्षा करेगी। उन्होंने दावा किया कि यदि किसी भाजपा समर्थक का नाम भी गलत तरीके से मतदाता सूची से हटाया जाता है तो सरकार उसके वोट की भी रक्षा करेगी।
उन्होंने भाजपा पर चुनावी मुकाबले में जनता का समर्थन हासिल करने के बजाय चुनावी तंत्र और निर्वाचन आयोग का इस्तेमाल करने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा को चुनाव लड़कर जनता का दिल जीतना चाहिए, न कि चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास करना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि कर्नाटक में एक लाख से अधिक मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश की गई और बड़ी संख्या में फॉर्म-7 आवेदन व्यवस्थित तरीके से तैयार किए गए। उन्होंने दावा किया कि भाजपा मुख्यालय में ये फॉर्म छापे गए और स्थानीय भाजपा नेताओं को अल्पसंख्यक, दलित और पिछड़ा वर्ग के मतदाताओं के नाम और पते वाले फॉर्म उपलब्ध कराए गए।
शिवकुमार के मुताबिक, कुछ स्थानीय नेताओं ने आवेदन जमा करते समय अपने पहचान पत्र और फोन नंबर का भी इस्तेमाल किया। उन्होंने दावा किया कि सरकार को कथित गड़बड़ी की जानकारी मिलने और शिकायत दर्ज होने के बाद भाजपा नेताओं ने बूथ स्तर के अधिकारियों (बीएलओ) से संपर्क किया और जमा किए गए कुछ फॉर्म-7 वापस ले लिए।
उन्होंने फॉर्म दिखाते हुए कहा कि ये आवेदन कंप्यूटर से तैयार और प्रिंट किए गए हैं। उन्होंने सवाल किया कि क्या सामान्य ग्रामीण इतनी बड़ी संख्या में इस तरह के आवेदन खुद तैयार कर सकते हैं।
शिवकुमार ने दावा किया कि बाद में बड़ी संख्या में आवेदन वापस ले लिए गए। उन्होंने केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी और भाजपा नेताओं आर. अशोक तथा चलवाड़ी नारायणस्वामी समेत अन्य एनडीए नेताओं के राज्यपाल से मिलने और मामलों की जांच रोकने की मांग पर भी सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि अगर अधिकारियों ने समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया होता तो कथित तौर पर मतदाता सूची में नाम हटाने की प्रक्रिया पूरी हो जाती। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि निर्वाचन आयोग ने भी मामले का संज्ञान लिया और राज्यों को विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया।
शिवकुमार ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की ओर से उठाए गए मुद्दे का समर्थन करते हुए कहा कि यह केवल कांग्रेस का मामला नहीं है, बल्कि पूरे देश से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि मतदान का अधिकार जीवन के अधिकार से जुड़ा है और विपक्ष के नेता के तौर पर राहुल गांधी की जिम्मेदारी है कि वह हर मतदाता के अधिकार की रक्षा करें।
उन्होंने कहा कि देश के अन्य हिस्सों से भी ऐसी चिंताएं सामने आई हैं और सरकार मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगी।
--आईएएनएस
डीएससी
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