गाजियाबाद, 8 अक्टूबर (आईएएनएस)। दिल्ली-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर से सफर करने वाले यात्रियों को जल्द ही यात्रा के दौरान भारतीय कला, संस्कृति और समृद्ध विरासत की झलक देखने को मिलेगी। नमो भारत स्टेशनों को केवल आवागमन के केंद्र के बजाय कला, संस्कृति और सार्वजनिक सहभागिता के जीवंत मंच के रूप में विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। इसके लिए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (एनसीआरटीसी) ने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं।
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गाजियाबाद, 8 अक्टूबर (आईएएनएस)। दिल्ली-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर से सफर करने वाले यात्रियों को जल्द ही यात्रा के दौरान भारतीय कला, संस्कृति और समृद्ध विरासत की झलक देखने को मिलेगी। नमो भारत स्टेशनों को केवल आवागमन के केंद्र के बजाय कला, संस्कृति और सार्वजनिक सहभागिता के जीवंत मंच के रूप में विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। इसके लिए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (एनसीआरटीसी) ने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं।
इस समझौते के तहत नमो भारत स्टेशनों पर कला एवं सांस्कृतिक प्रदर्शनियों, साहित्यिक कार्यक्रमों, कार्यशालाओं, व्याख्यानों, विरासत से जुड़ी झलकियों और विभिन्न सांस्कृतिक आयोजनों का आयोजन किया जाएगा। इसका उद्देश्य यात्रियों को उनकी रोजाना की यात्रा के दौरान भारत की विविध कला और सांस्कृतिक परंपराओं को करीब से जानने और समझने का अवसर उपलब्ध कराना है। दिल्ली-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर दो ऐसे महत्वपूर्ण शहरों को जोड़ता है, जिनका भारत के इतिहास और संस्कृति में विशेष स्थान है।
दिल्ली सदियों से देश की राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रही है। वहीं मेरठ और इसके आसपास का क्षेत्र भी प्राचीन इतिहास और सांस्कृतिक विरासत से समृद्ध है। मेरठ को महाभारतकालीन संदर्भों से जोड़कर देखा जाता है और 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में भी इस शहर की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। ऐसे में एनसीआरटीसी और आईजीएनसीए की यह साझेदारी यात्रियों को आधुनिक परिवहन सुविधा के साथ देश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का माध्यम बनेगी। एमओयू के तहत दोनों संस्थाएं नमो भारत स्टेशन परिसरों में सांस्कृतिक और सार्वजनिक जुड़ाव से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों की संभावनाएं तलाशेंगी। इनमें विशेष कला प्रदर्शनियां, भारतीय विरासत से संबंधित प्रस्तुतियां, साहित्यिक कार्यक्रम, कार्यशालाएं, व्याख्यान और जागरूकता कार्यक्रम शामिल होंगे।
आईजीएनसीए अपनी कला, संस्कृति और विरासत संबंधी विशेषज्ञता के माध्यम से इन कार्यक्रमों की विषयवस्तु और गतिविधियों में सहयोग करेगा, जबकि एनसीआरटीसी नमो भारत स्टेशनों को इन आयोजनों के लिए सार्वजनिक मंच उपलब्ध कराएगा। इससे यात्रियों के अलावा छात्रों, कलाकारों, शिक्षण संस्थानों और सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े लोगों को भी स्टेशनों से जुड़ने के अवसर मिलेंगे। दिल्ली-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर पर यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। वर्तमान में इस कॉरिडोर पर प्रतिदिन करीब 1.1 लाख यात्री सफर कर रहे हैं।
कॉरिडोर अब तक 4.5 करोड़ कम्यूटर ट्रिप्स का महत्वपूर्ण आंकड़ा भी पार कर चुका है। यात्रियों की बढ़ती संख्या से साफ है कि नमो भारत लोगों के बीच आधुनिक और तेज परिवहन के विकल्प के रूप में अपनी जगह बना रहा है। इसी बढ़ते यात्री आधार को देखते हुए नमो भारत स्टेशनों को सार्वजनिक गतिविधियों और सामाजिक जुड़ाव के केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं। सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से यात्रियों को यात्रा के दौरान देश की कला और विरासत से परिचित कराने की योजना इसी प्रयास का हिस्सा है।
एनसीआरटीसी और आईजीएनसीए की यह साझेदारी इस विचार पर आधारित है कि संस्कृति तक पहुंचने के लिए हमेशा लोगों को अलग से किसी स्थान की तलाश करने की जरूरत नहीं होनी चाहिए। रोजाना की यात्रा के दौरान भी लोगों को कला, साहित्य, इतिहास और विरासत से परिचित कराया जा सकता है। इस पहल के जरिए नमो भारत स्टेशन ऐसे जीवंत सोशल हब के रूप में विकसित किए जाएंगे, जहां यात्रियों को परिवहन सुविधा के साथ-साथ सांस्कृतिक अनुभव भी मिल सकेगा। भारतीय कला और परंपराओं को सार्वजनिक स्थानों तक पहुंचाने से बच्चों और युवाओं में देश की सांस्कृतिक विविधता को समझने और उसके प्रति रुचि बढ़ाने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
एनसीआरटीसी के अनुसार, जैसे-जैसे नमो भारत राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के विभिन्न शहरों और समुदायों को जोड़ रहा है, वैसे-वैसे इसके स्टेशन केवल आने-जाने के स्थान न रहकर लोगों को भारत की कहानियों, परंपराओं और कलात्मक अभिव्यक्तियों से जोड़ने वाले मंच के रूप में भी विकसित होंगे। इससे आधुनिक परिवहन और भारतीय सांस्कृतिक विरासत के बीच एक नया और प्रभावी जुड़ाव स्थापित होगा।
--आईएएनएस
पीकेटी/डीकेपी
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