Office Address

Address Display Here

Phone Number

+91-9876543210

Email Address

info@deshbandhu.co.in

मध्य प्रदेश: ड्रग्स मामले में 90 से अधिक पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर से राजनीतिक माहौल गर्म


भोपाल/उज्जैन, 17 जून (आईएएनएस)। विवादित ड्रग्स जब्ती मामले में दो पूर्व स्टेशन हाउस अधिकारियों (एसएचओ) सहित 90 से अधिक पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने से राज्य में राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। विपक्षी कांग्रेस ने मादक पदार्थों से संबंधित अपराधों से निपटने के तरीके को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा है।

भोपाल/उज्जैन, 17 जून (आईएएनएस)। विवादित ड्रग्स जब्ती मामले में दो पूर्व स्टेशन हाउस अधिकारियों (एसएचओ) सहित 90 से अधिक पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने से राज्य में राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। विपक्षी कांग्रेस ने मादक पदार्थों से संबंधित अपराधों से निपटने के तरीके को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा है।

पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ ने बुधवार को कहा कि इस घटनाक्रम से मध्य प्रदेश में कानून व्यवस्था और पुलिस बल के कामकाज को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा होती हैं।

नाथ ने कहा कि मध्य प्रदेश में कानून व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। राज्य तेजी से मादक पदार्थों के निर्माण और तस्करी का केंद्र बनता जा रहा है। इस खतरे को रोकने के लिए जिम्मेदार पुलिस बल खुद ही धोखाधड़ी में लिप्त है।

एक कमल नाथ ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार राज्य में सक्रिय ड्रग नेटवर्क को खत्म करने में विफल रही है और इसके बजाय निर्दोष लोगों को फंसाने दे रही है।

उन्होंने एक बयान में कहा कि इससे यह बात साफ हो जाती है कि भाजपा सरकार नशीले पदार्थों के रैकेटों को खत्म करने या भ्रष्ट अधिकारियों पर लगाम लगाने में नाकाम रही है। निर्दोष लोगों को नशीले पदार्थों की तस्करी के मामलों में फंसाया जा रहा है, जबकि असली तस्कर अपना अवैध धंधा चलाते जा रहे हैं।

यह विवाद इस साल 28 जनवरी को राजस्थान के झालावाड़ जिले के घटाखेड़ी गांव में अगर मालवा पुलिस द्वारा चलाए गए एक अभियान से जुड़ा है।

उस समय पुलिस ने दावा किया था कि उन्होंने एक एमडी ड्रग निर्माण इकाई का भंडाफोड़ किया है और लगभग 5 करोड़ रुपए के नशीले पदार्थ, रसायन और मशीनरी जब्त की है।

इस अभियान को राज्य के नशीले पदार्थों के खिलाफ अभियान में एक बड़ी सफलता के रूप में पेश किया गया था और दो लोगों को नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंसेस (एनडीपीएस) एक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया था।

हालांकि, आरोपियों के परिवार वालों और स्थानीय निवासी हामिद खान ने बाद में चौमहला स्थित अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि छापा फर्जी था और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया था।

उन्होंने यह भी दावा किया कि पुलिस की एक बड़ी टीम ने अभियान के दौरान परिवार के कई सदस्यों को गांव से अपने साथ ले गई थी।

इसके बाद अदालत ने झालावाड़ के पुलिस उपाधीक्षक को जांच का आदेश दिया।

जांच रिपोर्ट और सबूतों की जांच के बाद, अदालत ने प्रथम दृष्टया आपराधिक मामला दर्ज करने के लिए पर्याप्त सबूत पाए और राजस्थान पुलिस को कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

आदेश के बाद, झालावाड़ जिले के दाग पुलिस स्टेशन ने अगर कोतवाली के पूर्व एसएचओ शशि उपाध्याय और रूप सिंह राजपूत, पुलिसकर्मी राखी गुर्जर, तीन अन्य नामजद व्यक्तियों और लगभग 90 अज्ञात पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की।

भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है, जिनमें धमकी देना, पद का दुरुपयोग, कदाचार और साक्ष्य से छेड़छाड़ से संबंधित धाराएं शामिल हैं।

यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण है, क्योंकि अदालत के निर्देश पर हुई जांच के बाद एक राज्य के इतने अधिक पुलिसकर्मियों का दूसरे राज्य में आपराधिक कार्रवाई का सामना करना दुर्लभ है।

इस मामले से मध्य प्रदेश में सत्ताधारी भाजपा और विपक्षी कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव और बढ़ने की आशंका है।

--आईएएनएस

एमएस/

Share:

Leave A Reviews

Related News