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'इतिहास से सीखें,' पंजाब भाजपा प्रमुख ने सीएम भगवंत मान को सलाह दी


चंडीगढ़, 17 जून (आईएएनएस)। पंजाब भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने बुधवार को मुख्यमंत्री भगवंत मान को इतिहास से सीख लेने की सलाह दी और उन्हें याद दिलाया कि शेर-ए-पंजाब महाराजा रणजीत सिंह भी अकाल तख्त के सामने झुके थे।

चंडीगढ़, 17 जून (आईएएनएस)। पंजाब भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने बुधवार को मुख्यमंत्री भगवंत मान को इतिहास से सीख लेने की सलाह दी और उन्हें याद दिलाया कि शेर-ए-पंजाब महाराजा रणजीत सिंह भी अकाल तख्त के सामने झुके थे।

ढिल्लों ने कहा कि राजनीतिक सत्ता का अहंकार कभी भी गुरु की संस्था की पवित्रता से बड़ा नहीं होना चाहिए।

उन्होंने कहा, "श्री अकाल तख्त साहिब का दर्जा और अधिकार किसी भी मुख्यमंत्री की कुर्सी से ऊंचा है—आज, कल और हमेशा।"

उन्होंने याद दिलाया कि महाराजा रणजीत सिंह, जिनके नेतृत्व में पंजाब एक शक्तिशाली साम्राज्य बना और अफगानों व मुगलों में उनका खौफ था, उन्हें भी एक बार श्री अकाल तख्त साहिब ने तलब किया था।

जत्थेदार अकाली बाबा फूला सिंह ने उन्हें 'तनखैया' (धार्मिक कदाचार का दोषी) घोषित किया था। महाराजा ने बिना किसी विरोध के सजा स्वीकार की और विनम्रता से अपना सिर झुका दिया।

ढिल्लों ने कहा, "उनकी असाधारण विनम्रता को देखकर संगत ने उन्हें माफ कर दिया। यही 'शेर-ए-पंजाब' की असली पहचान थी—एक ऐसा नेता जिसके लिए आस्था और पंथ किसी भी राजनीतिक या शाही सत्ता से ऊपर थे।"

इसके विपरीत, ढिल्लों ने आरोप लगाया कि जब अकाल तख्त साहिब ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को गुरु-द्रोही और खालसा पंथ-विरोधी घोषित किया तो उन्होंने विनम्रता दिखाने के बजाय इस फैसले को राजनीतिक साजिश बताकर खारिज कर दिया।

उन्होंने मान पर जत्थेदार पर सवाल उठाने और सेंट्रल फोरेंसिक लेबोरेटरी की रिपोर्ट को खारिज करने की कोशिश करने का भी आरोप लगाया।

ढिल्लों ने अपनी बात खत्म करते हुए कहा कि इतिहास गवाह है कि जो लोग श्री अकाल तख्त साहिब को चुनौती देते हैं, उन्हें कभी भी राजनीतिक या सामाजिक रूप से कोई फायदा नहीं होता।

उन्होंने कहा, "भगवंत मान को इतिहास से सीख लेनी चाहिए।"

--आईएएनएस

डीकेएम/डीकेपी

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