
झांसी में पुलिस ने एक ऐसे शातिर ठग को गिरफ्तार किया है जो पिछले डेढ़ साल से खुद को 'एंटी करप्शन एंड क्राइम कंट्रोल फोर्स' का डीआईजी (DIG) बताकर शहर के बड़े व्यापारियों को अपना शिकार बना रहा था। आरोपी मनीष कुमार काली वर्दी, नकली पहचान पत्र और चार गनमैन के साथ घूमकर लोगों पर रौब झाड़ता था। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर उसके पास से 'राष्ट्रीय असिस्टेंट प्रमुख' की प्लेट लगी कार भी जब्त कर ली है।
ठगी का सबसे बड़ा शिकार शहर के प्रतिष्ठित सर्राफा कारोबारी प्रियांश सिंघल बने। आरोपी मनीष ने प्रियांश को एंटी करप्शन की एक फर्जी एफआईआर (FIR) और नकली आईडी कार्ड दिखाया। उसने प्रियांश से कहा कि उसके खिलाफ भ्रष्टाचार की गंभीर शिकायत आई है। इस फर्जी केस को रफा-दफा करने और फाइनल रिपोर्ट लगाकर फाइल दिल्ली भेजने के नाम पर आरोपी ने अलग-अलग किस्तों में प्रियांश से कुल 29.5 लाख रुपये हड़प लिए।
आरोपी मनीष बेहद शातिर तरीके से हर बार प्रियांश से अकेले में वर्दी पहनकर ही मिलता था, जिससे उसका वीआईपी रसूख देखकर किसी को शक न हो। हद तो तब हो गई जब फरवरी महीने में वह प्रियांश की शादी में बिना बुलाए ही पहुंच गया। काली वर्दी और चार गनमैन के साथ शादी समारोह में एंट्री लेकर उसने दूल्हे (प्रियांश) के साथ मंच पर फोटो खिंचवाई और मेहमानों के बीच अपना दबदबा दिखाया, ताकि प्रियांश का भरोसा पूरी तरह जीता जा सके।
इस ठगी की स्क्रिप्ट एक पुराने पारिवारिक लेनदेन से जुड़ी थी। प्रियांश सिंघल के स्वर्गीय पिता और एक रिटायर्ड प्रोफेसर एके गुप्ता के बीच पुराना आर्थिक लेनदेन था। प्रोफेसर गुप्ता ने अपनी मदद के लिए 'एंटी करप्शन एंड क्राइम कंट्रोल फोर्स' नाम की एक संस्था से संपर्क किया था, जहां से केस की पर्चियां और गुप्त जानकारियां मनीष के हाथ लग गईं। मनीष जब प्रियांश की दुकान पर पहुंचा, तो उसने प्रोफेसर और प्रियांश के बीच की सारी पुरानी बातें दोहरा दीं। इससे प्रियांश पूरी तरह उसके झांसे में आ गया।
ठगी का खुलासा तब हुआ जब प्रियांश की मुलाकात कलेक्ट्रेट में अचानक प्रोफेसर गुप्ता से हुई। बातों-बातों में प्रियांश को ठगी का अहसास हुआ। इसके बाद जब उसने झांसी एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) के दफ्तर जाकर पूछताछ की, तो पता चला कि मनीष नाम का कोई भी इंस्पेक्टर या अधिकारी वहां तैनात ही नहीं है। इसके बाद पीड़ित ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस जांच में सामने आया कि जिस 'एंटी करप्शन एंड क्राइम कंट्रोल फोर्स' के नाम पर मनीष रौब दिखाता था, वह कोई सरकारी विभाग नहीं बल्कि सीपरी बाजार (सिद्धेश्वर नगर) में स्थित एक गैर-सरकारी संगठन (NGO) है। इसे एक सेवानिवृत्त कर्मचारी चंद्रशेखर आजाद द्वारा चलाया जाता है, जो सिर्फ पीड़ितों को कानूनी सलाह और शिकायत सही प्रारूप में पुलिस तक पहुंचाने का काम करता है। इस संस्था के पास गिरफ्तारी या जांच का कोई सरकारी अधिकार नहीं है।
फिलहाल, सिविल लाइन थाना पुलिस ने आरोपी मनीष को गिरफ्तार कर लिया है और उससे पूछताछ कर यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि उसने शहर में और कितने लोगों को अपनी ठगी का शिकार बनाया है।
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