
भिंड. जिला अंतर्गत अटेर क्षेत्र के करीब 20 गांवों में पिछले तीन दिनों (72 घंटे) से बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप होने के कारण जनजीवन बुरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। भीषण गर्मी के इस मौसम में लगातार बिजली गुल रहने से जहां एक तरफ ग्रामीण इलाकों में पेयजल का भारी संकट गहरा गया है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय छोटे उद्योग, कारखाने और रोजमर्रा के कामकाज पूरी तरह से ठप पड़ गए हैं। बिजली विभाग की इस लचर कार्यप्रणाली से स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार, अटेर सब-स्टेशन (Sub-station) से जुड़े 20 से अधिक गांवों में पिछले तीन दिनों से बिजली का एक भी बल्ब नहीं जला है। बिजली न होने का सबसे बुरा असर पानी की सप्लाई पर पड़ा है, जिससे लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं।
इसके अलावा ग्रामीण अंचलों में संचालित:
वित्तीय सेवाएं: बैंकों और डाकघरों (Post Offices) में बिजली और इंटरनेट बैकअप न होने से कामकाज प्रभावित हो रहा है।
स्थानीय कारोबार: आटा चक्की, छोटे कारखाने और वेल्डिंग दुकानें पूरी तरह बंद पड़ी हैं, जिससे दैनिक मजदूरों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
बिजली विभाग (MP Electricity Department) के स्थानीय अधिकारियों से जब इस महा-ब्लैकआउट के कारणों के बारे में जानकारी ली गई, तो उन्होंने बताया कि भिंड मुख्य केंद्र से अटेर की ओर आने वाली 33 केवी (33 KV) हाई-टेंशन लाइन में गंभीर तकनीकी खराबी आई है।
विभाग की तकनीकी टीम (Technical Team) पिछले 48 घंटों से लगातार पेट्रोलिंग कर फॉल्ट ढूंढने और लाइन सुधारने के कार्य में जुटी हुई है, लेकिन जंगली और मैदानी इलाका होने के कारण खराबी को पूरी तरह ठीक करने में उम्मीद से ज्यादा समय लग रहा है।
स्थानीय ग्रामीण विनोद शर्मा, सुरेश प्रजापति, रामनरेश, अखिलेश यादव और बंटी बघेल सहित सैकड़ों प्रभावित ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन और बिजली कंपनी के उच्च अधिकारियों से शीघ्र विद्युत आपूर्ति बहाल कराने की गुहार लगाई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि अगले 24 घंटे के भीतर बिजली चालू नहीं की गई, तो पानी का संकट बेकाबू हो जाएगा और वे चक्काजाम व आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।
Leave A Reviews