
नर्मदापुरम. जनता की सेवा और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए जिम्मेदार कुर्सियों पर बैठे अधिकारी अब खुद को आम जनता का ‘माई-बाप’ समझने लगे हैं। ऐसा ही एक शर्मनाक और हैरान करने वाला मामला मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले के पिपरिया से सामने आया है। यहां बिजली विभाग की लापरवाही और मनमाने बिलों की शिकायत करने पहुंचे एक अन्नदाता (किसान) को सरेआम जलील और अपमानित होना पड़ा। मलकजरा गांव में किसानों की समस्याओं को सुलझाने के लिए लगाया गया बिजली शिविर अधिकारी की बदतमीजी के कारण विवाद का अखाड़ा बन गया।
मिली जानकारी के अनुसार, पिपरिया के मलकजरा गांव में बिजली विभाग द्वारा उपभोक्ताओं और विशेषकर किसानों की बिजली से जुड़ी समस्याओं के त्वरित निराकरण के लिए एक विशेष शिविर (Grievance Camp) का आयोजन किया गया था। क्षेत्र के कई किसान अपनी जायज समस्याओं और शिकायतों को लेकर बड़ी उम्मीद के साथ कैंप में पहुंचे थे।
लेकिन वहां मौजूद बिजली विभाग के जूनियर इंजीनियर (JE) महेंद्र सिंह गौंडे जनता की समस्या सुनने के मूड में नहीं थे। जैसे ही पीड़ित किसान अपनी शिकायत लेकर उनके टेबल के पास पहुंचा, जेई अपना आपा खो बैठे। चश्मदीदों और पीड़ित के मुताबिक, जेई महेंद्र सिंह गौंडे ने किसान के साथ न सिर्फ बेहद अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हुए गाली-गलौज की, बल्कि पूरी तरह तानाशाही रवैया अपनाते हुए उन्हें कॉलर पकड़कर और धक्के मारकर सरेआम शिविर से बाहर निकलवा दिया।
इस घटना के सामने आने के बाद बिजली विभाग के प्रशासनिक ढर्रे पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जेई महेंद्र सिंह गौंडे का यह व्यवहार कोई नया नहीं है। उनके खिलाफ पहले भी सीएम हेल्पलाइन (CM Helpline) पर प्रताड़ना और लापरवाही की कई शिकायतें दर्ज कराई जा चुकी हैं। इसके बावजूद वरिष्ठ अधिकारियों या जिला प्रशासन द्वारा अब तक कोई ठोस अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की गई। जनता के टैक्स के पैसों से मोटी सैलरी पाने वाले एक जिम्मेदार अधिकारी के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे सरेआम अन्नदाता को अपमानित कर रहे हैं।
ग्रामीणों की मांग: शिविर में किसान के साथ हुई इस बदसलूकी और धक्केशाही का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो सामने आने के बाद पूरे नर्मदापुरम जिले के किसान संगठनों और ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है। किसान नेताओं ने साफ शब्दों में कहा है कि यदि आरोपी जेई महेंद्र सिंह गौंडे को तुरंत पद से निलंबित (Suspend) नहीं किया गया और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं हुई, तो वे उग्र आंदोलन और बिजली दफ्तर का घेराव करेंगे। फिलहाल इस पूरे मामले पर बिजली विभाग के आला अधिकारियों ने चुप्पी साध रखी है।
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