
छतरपुर जिले के कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम बरकौंहा में शनिवार को एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां गांव स्थित काली मंदिर का प्रसाद खाने के महज 20 मिनट के भीतर एक ही परिवार के आठ लोगों की अचानक तबीयत बिगड़ गई। परिजनों के अनुसार, प्रसाद ग्रहण करते ही एक-एक कर सभी सदस्यों को चक्कर आने लगे, कई लोग बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़े और कुछ सदस्य घबराहट में असामान्य व अप्रासंगिक बातें करने लगे। आनन-फानन में शनिवार तड़के सभी प्रभावितों को छतरपुर जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों की टीम उनका गहन उपचार कर रही है। बीमारों में चार मासूम बच्चे और एक सात माह की गर्भवती महिला भी शामिल हैं। इनमें से दो वर्षीय बच्चे की स्थिति गंभीर होने पर उसे पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (PICU) में भर्ती कराया गया है।
पीड़ित परिवार के सदस्य गणेश कुशवाह ने बताया कि शुक्रवार शाम गांव के काली मंदिर में पूजा-अर्चना के उपरांत लगभग आधा किलो पेड़ा प्रसाद के रूप में प्राप्त हुआ था। देर शाम घर के सदस्यों ने जैसे ही यह प्रसाद खाया, उसके कुछ ही मिनटों बाद सभी को तेज चक्कर, घबराहट और बेचैनी होने लगी। देखते ही देखते आठों सदस्यों की हालत असामान्य हो गई, जिससे घर में चीख-पुकार मच गई। आसपास के ग्रामीणों की मदद से सुबह करीब 6 बजे सभी को जिला अस्पताल लाया गया। बीमार पड़ने वालों में 55 वर्षीय घनश्याम, 50 वर्षीया हरबाई, 26 वर्षीया धनवांती, 23 वर्षीया रामकली कुशवाह (7 माह की गर्भवती), 11 वर्षीय नीराज, 8 वर्षीय सीता कुशवाह, 2 वर्षीय करण और लगभग डेढ़ वर्ष की पूनम शामिल हैं।
घटना के संदर्भ में परिजनों ने गांव के ही एक युवक पर तंत्र-मंत्र और संदिग्ध गतिविधियों का आरोप लगाते हुए कहा है कि वह मंदिर में बैठकर तांत्रिक क्रियाएं करता है। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि तंत्र-मंत्र के आरोपों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। प्रथम दृष्टया यह मामला दूषित खाद्य पदार्थ या विषाक्तता (फूड पॉइजनिंग) से जुड़ा प्रतीत हो रहा है। स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम मंदिर में वितरित प्रसाद के नमूने संकलित कर प्रयोगशाला जांच के लिए भेजने की तैयारी में है, ताकि विषाक्तता के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके।
छतरपुर जिला अस्पताल के डॉ. शरद मिश्रा ने स्थिति की जानकारी देते हुए बताया कि सुबह जब आठों मरीजों को लाया गया था, तब सभी में सिर चकराने, घबराहट और मानसिक रूप से अप्रासंगिक बातें करने जैसे न्यूरोटॉक्सिक व गैस्ट्रिक लक्षण देखे गए थे। प्रारंभिक उपचार के बाद गर्भवती महिला सहित सात मरीजों की स्थिति अब पूरी तरह स्थिर और नियंत्रण में है। महिला रोग विशेषज्ञों (गायनिक टीम) ने गर्भवती महिला का विशेष परीक्षण किया है। वहीं दो वर्षीय बालक करण की स्थिति गंभीर होने के कारण उसे पीआईसीयू में बाल रोग विशेषज्ञों की सतत निगरानी में रखा गया है। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार मेडिसिन, पीडियाट्रिक और गायनिक विशेषज्ञों का संयुक्त दल सभी मरीजों की स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
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