
रामनगर/सतना/मैहर. 21 जून 2026: केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने अधिसूचना एस.ओ. 3289(ई) दिनांक 12 जुलाई 2023 के तहत 16 तर्कहीन स्थिर खुराक संयोजन दवाओं पर देशव्यापी प्रतिबंध लगाया है. सतना, मैहर और रामनगर में इसका सीधा असर दिख रहा है. जिला औषधि प्रशासन ने 25 जून 2026 तक सभी दवा की दुकानों से माल वापस मंगाने का आदेश जारी किया है. इन तीनों क्षेत्रों में इन दवाओं का अनुमानित सालाना कारोबार 60 से 80 लाख रुपये का था.
प्रतिबंध की समय-सीमा
2016: औषधि तकनीकी सलाहकार मंडल ने 344 स्थिर खुराक संयोजन को तर्कहीन बताया.
2018: सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र को फिर से जांच का आदेश दिया.
2023: 12 जुलाई को 14 स्थिर खुराक संयोजन पर प्रतिबंध की अधिसूचना जारी.
2026: 25 जून तक सतना-मैहर में माल वापसी की अंतिम तिथि.
1. कौन सी दवाएं, कितना कारोबार
प्रतिबंधित 16 संयोजन पेट दर्द, मरोड़, जीवाणु संक्रमण और प्रकार-2 मधुमेह में धड़ल्ले से बिकते थे. औषधि तकनीकी सलाहकार मंडल ने इन्हें तर्कहीन और खतरनाक माना है.
पेट दर्द और मरोड़: साइक्लोपाम, स्पास्मो-प्रॉक्सीवॉन प्लस, कोलीमेक्स, ट्राइगन-डी जैसे नाम से बिकने वाले संयोजनों में क्लिडिनियम और क्लोरडायजेपॉक्साइड जैसे आदत बनाने वाले घटक थे. सतना-मैहर में इनकी अनुमानित मासिक बिक्री 3 से 4 लाख रुपये थी.
जीवाणु संक्रमण: मॉक्सीकाइंड-सीवी, नोवामॉक्स, जोसेफ-सीवी, सेफ्टम-सी में प्रतिजैविक के साथ सेरेशियोपेप्टिडेज मिलाया गया था, जिसका कोई अतिरिक्त लाभ सिद्ध नहीं है. जिले में कुल प्रतिजैविक कारोबार का 40 प्रतिशत हिस्सा इन्हीं तर्कहीन संयोजनों का था.
मधुमेह: रेक्लाइड, ग्लूकोनॉर्म-जी में ग्लाइक्लाजाइड के साथ क्रोमियम पिकोलिनेट मिलाया गया था, जिसकी मधुमेह में भूमिका प्रमाणित नहीं है.
2. आंकड़ों की जुबानी हकीकत
राष्ट्रीय स्तर: इन 16 संयोजनों का सालाना अनुमानित कारोबार 350 से 400 करोड़ रुपये था.
मध्य प्रदेश: राज्य का सालाना कारोबार लगभग 15 से 20 करोड़ रुपये था.
सतना-मैहर-रामनगर: अनुमानित सालाना कारोबार 60 से 80 लाख रुपये.
जिला स्तरीय असर: जिले में लगभग 1200 से अधिक दवा की दुकानों पर औसत 4,000 से 6,000 रुपये का माल फंसा है. सतना शहर में 500 दुकानों पर लगभग 30 लाख, मैहर में 400 दुकानों पर लगभग 18 लाख, और रामनगर-उचेहरा-अमरपाटन क्षेत्र में 300 दुकानों पर लगभग 12 लाख रुपये का माल वापसी के इंतजार में है. कुल मिलाकर लगभग 60 लाख रुपये का माल फंसा है.
3. समालोचनात्मक विश्लेषण: किसका फायदा, किसका नुकसान
सबसे बड़ा फायदा मरीजों को: औषधि तकनीकी सलाहकार मंडल के अनुसार स्थिर खुराक संयोजन की कीमत एकल दवा से 30 से 50 प्रतिशत अधिक थी. अब मरीज को सिर्फ जरूरत की दवा मिलेगी. इससे मासिक खर्च 300 से 500 रुपये तक कम हो सकता है. तर्कहीन प्रतिजैविक संयोजन हटने से प्रतिजैविक प्रतिरोध का खतरा भी घटेगा. आदत बनाने वाले घटकों पर रोक से लत का खतरा टलेगा.
सबसे बड़ा नुकसान छोटी कंपनियों और प्रतिनिधियों को: सन औषधि, सिप्ला, एल्केम जैसी बड़ी कंपनियों के कुल कारोबार में इन दवाओं की हिस्सेदारी 1 प्रतिशत से भी कम है. लेकिन 200 से अधिक छोटी औषधि कंपनियों के कारोबार का 20 से 40 प्रतिशत हिस्सा इन्हीं दवाओं पर टिका था. उनके लिए यह बड़ा झटका है. सतना-रीवा संभाग में इन दवाओं का प्रचार करने वाले 300 से 400 औषधि प्रतिनिधियों की नौकरी सीधे खतरे में है. जिले के 25 से अधिक थोक विक्रेताओं के पास लाखों का माल फंस गया है.
सिस्टम की नाकामी भी उजागर: इन 16 संयोजनों में से 11 को राज्य औषधि नियंत्रकों ने बिना केंद्रीय अनुमोदन के अनुमति दी थी. केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन की अनुमति के बिना ये बाजार में पहुंच गईं. यह नियामक तालमेल की कमी दिखाता है. वर्षों तक मरीजों को अनावश्यक दवा और खर्च झेलना पड़ा. अब प्रतिबंध लगा तो दुकानदार और छोटी कंपनियां नुकसान झेल रही हैं. नियामक व्यवस्था को पहले ही सख्त होना चाहिए था.
4. प्रशासनिक सख्ती और आगे का रास्ता
25 जून 2026 के बाद प्रतिबंधित दवा रखने या बेचने पर औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 की धारा 18(सी) के तहत कार्रवाई होगी. इसमें अनुज्ञप्ति रद्द, 3 वर्ष तक कारावास और जुर्माना शामिल है. सूचना निःशुल्क नंबर 104 पर दी जा सकती है. औषधि तकनीकी सलाहकार मंडल 34 अन्य स्थिर खुराक संयोजनों की जांच कर रहा है. इनमें सर्दी-खांसी और दर्द निवारक के कई संयोजन शामिल हैं. अगले 6 महीने में इन पर भी प्रतिबंध संभव है.
5. मरीज क्या करें: उपलब्ध विकल्प
प्रतिबंध केवल 16 स्थिर खुराक संयोजन पर है. घबराएं नहीं. पंजीकृत चिकित्सक की सलाह से ही दवा बदलें.
पेट दर्द के लिए: डाइसाइक्लोमाइन अकेली गोली, पैरासिटामोल अकेली गोली.
जीवाणु संक्रमण के लिए: अमॉक्सिसिलिन अकेली, सेफुरोक्सिम अकेली.
मधुमेह के लिए: ग्लाइक्लाजाइड अकेली गोली.
पुराने पर्चे पर भी प्रतिबंधित संयोजन न खरीदें. सभी एकल दवाएं बाजार में उपलब्ध हैं.
एकस्व की स्थिति: इन 16 संयोजनों पर किसी का एकस्व नहीं है. सभी घटक सामान्य श्रेणी के हैं. 300 से अधिक कंपनियां बनाती थीं, जिनमें 95 प्रतिशत भारतीय हैं.
: यह प्रतिबंध देर से उठाया गया कदम है, लेकिन सही दिशा में है. तर्कहीन दवाओं का कारोबार 400 करोड़ का था, जो अब शून्य होगा. इससे मरीजों की जेब और सेहत दोनों बचेगी. लेकिन नियामक तंत्र को अब यह सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य में कोई भी तर्कहीन संयोजन बाजार में न पहुंचे. दुकानदारों और छोटे प्रतिनिधियों के नुकसान की भरपाई के लिए सरकार को नीति बनानी चाहिए. वरना यह कार्रवाई सिर्फ आधी सफल मानी जाएगी.
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