Office Address

Address Display Here

Phone Number

+91-9876543210

Email Address

info@deshbandhu.co.in

BRICS Agriculture Summit: इंदौर के ग्रामीण हाट में मुग्ध हुए ब्रिक्स देशों के प्रतिनिधि, लहरी बाई के दुर्लभ मिलेट्स और सुंदरजा आम ने जीता दिल


इंदौर. मध्य प्रदेश की मिनी मुंबई कहे जाने वाले शहर इंदौर में 9 से 13 जून 2026 तक प्रतिष्ठित ब्रिक्स कृषि सम्मेलन (BRICS Agriculture Summit) का आयोजन किया जा रहा है। इस सम्मेलन में हिस्सा लेने आए विभिन्न देशों के राजनयिकों और कृषि प्रतिनिधियों ने मंगलवार को इंदौर के प्रसिद्ध 'ग्रामीण हाट बाजार' का भ्रमण किया। इस दौरान विदेशी मेहमान मध्यप्रदेश की समृद्ध कृषि विरासत, ओडीओपी (एक जिला एक उत्पाद) के अनूठे प्रयोगों और प्राकृतिक खेती के मॉडल को देखकर पूरी तरह दंग रह गए।

विदेशी प्रतिनिधियों ने न केवल हर स्टॉल पर रुककर ग्रामीण उत्पादकों और महिला स्व-सहायता समूहों से बातचीत की, बल्कि जमकर खरीदारी भी की। मेहमानों ने स्पष्ट संकेत दिया कि मध्यप्रदेश का यह सस्टेनेबल ग्रामीण विकास मॉडल वैश्विक स्तर पर एक बड़ी प्रेरणा बन सकता है।

पारंपरिक पगड़ी पहनकर जनजातीय धुनों पर थिरके विदेशी मेहमान

ग्रामीण हाट पहुंचने पर विदेशी प्रतिनिधियों का स्वागत मालवा की पारंपरिक सांस्कृतिक परंपरा और आतिथ्य सत्कार के साथ किया गया। अतिथियों को पारंपरिक साफा (पगड़ी) पहनाकर सम्मानित किया गया। इस दौरान मध्य प्रदेश के जनजातीय कलाकारों ने लोक नृत्यों की ऐसी मनमोहक और ऊर्जावान प्रस्तुति दी कि कई विदेशी प्रतिनिधि खुद को रोक नहीं पाए और ढोल-मांदल की थाप पर लोक कलाकारों के साथ कदम से कदम मिलाकर झूमने लगे।

रीवा के सुंदरजा आम और बालाघाट के चिन्नौर चावल की धूम

इस प्रदर्शनी में रीवा जिले के जीआई टैग (GI Tag) प्राप्त प्रसिद्ध सुंदरजा आम ने विदेशी मेहमानों को बेहद आकर्षित किया। प्रतिनिधियों ने आम की इस खास किस्म का स्वाद चखा और इसकी अनूठी सुगंध व मिठास की जमकर तारीफ की। इसके साथ ही, अपनी लाजवाब खुशबू के लिए देश-विदेश में मशहूर बालाघाट के जीआई टैग प्राप्त चिन्नौर चावल के स्टॉल पर भी प्रतिनिधियों ने गहरी रुचि दिखाई।

मिलेट क्वीन लहरी बाई के दुर्लभ बीज संग्रह को देख अवाक रह गए प्रतिनिधि

डीडी किसान और वैश्विक मंचों पर पहचान बना चुकीं डिंडोरी-मंडला की 'मिलेट क्वीन' लहरी बाई का स्टॉल इस भ्रमण का सबसे बड़ा आकर्षण केंद्र रहा। लहरी बाई द्वारा दशकों की मेहनत से सहेजे गए दुर्लभ श्रीअन्न (मिलेट्स/मोटे अनाज) की विभिन्न पारंपरिक किस्मों के बीजों को देखकर ब्रिक्स देशों के प्रतिनिधि अवाक रह गए। विदेशी मेहमानों के लिए बीजों का यह अनोखा बैंक भारत की प्राचीन और समृद्ध कृषि विरासत का एक जीवंत दस्तावेज नजर आया।

ओडीओपी (ODOP) की ताकत: केले से बने वस्त्र और नरसिंहपुर का गुड़

एक जिला एक उत्पाद (ODOP) योजना के तहत लगाए गए बुरहानपुर के स्टॉल ने कृषि प्रसंस्करण की नई परिभाषा प्रस्तुत की।

  • बुरहानपुर: यहां केले की फसल से तैयार चिप्स और कुकीज के साथ-साथ केले के पौधों के बेकार तने (रेशों) से बने आकर्षक वस्त्रों को प्रदर्शित किया गया था। मूल्य संवर्धन (Value Addition) की इस तकनीक को प्रतिनिधियों ने ग्रामीण उद्यमिता का सर्वोत्कृष्ट उदाहरण बताया।

  • झाबुआ व नरसिंहपुर: झाबुआ के साठी मक्का, दूध मोगर मक्का, देशी उड़द और नरसिंहपुर के करेली का प्रसिद्ध पारंपरिक गुड़, नीमच की औषधीय फसलों ने भी आगंतुकों को बेहद प्रभावित किया।

खाट पर बैठकर चखा देसी स्वाद, सराहा भारतीय आतिथ्य

भारतीय ग्रामीण संस्कृति को करीब से महसूस कराने के लिए हाट बाजार में पारंपरिक खाटों (चारपाई) पर बैठने की व्यवस्था की गई थी। मेहमानों को मलबरी और तसर सिल्क, चंदेरी व महेश्वरी साड़ियों के बुनाई कौशल से परिचित कराने के साथ ही पूरी तरह से शुद्ध प्राकृतिक शहद, ए-2 दुग्ध उत्पाद और हर्बल नाश्ता परोसा गया। विदेशी मेहमानों ने खाट पर बैठकर देसी व्यंजनों का लुत्फ उठाया और भारतीय ग्रामीण आतिथ्य को पूरी दुनिया में अद्वितीय और बेमिसाल बताया।

Share:

Leave A Reviews

Related News