
भिंड जिले के अटेर वन परिक्षेत्र अंतर्गत आने वाले ग्राम थोना ज्ञानपुर में जंगली सूअर के लगातार हमलों से ग्रामीणों में भारी दहशत फैल गई। आक्रामक सूअर ने दो दिनों के भीतर अलग-अलग स्थानों पर दो ग्रामीणों पर जानलेवा हमला कर उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया। ग्रामीणों की सूचना पर पहुंची वन विभाग की टीम ने सूअर को काबू में करने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया, लेकिन रेस्क्यू के दौरान ही सूअर की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। रेस्क्यू दल प्रभारी ने सूअर की शारीरिक स्थिति असामान्य बताते हुए उसके पागल होने की आशंका जताई है, हालांकि वास्तविक कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा।
घटनाक्रम के अनुसार, पहले दिन खेतों की ओर जा रहे ग्रामीण बृजेंद्र सिंह (वकील) पर जंगली सूअर ने अचानक हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल बृजेंद्र को परिजन तत्काल उपचार के लिए उत्तर प्रदेश के इटावा ले गए, जहां उनका इलाज चल रहा है। इसके ठीक अगले दिन सूअर ने गांव के ही मेवाराम बघेल पर हमला कर उन्हें लहुलूहान कर दिया। घायल मेवाराम को भिंड के जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया है। लगातार 48 घंटों में दो ग्रामीणों के घायल होने से आक्रोशित ग्रामीणों ने वन विभाग के उच्चाधिकारियों को मामले की सूचना दी।
सूचना मिलने के बाद रेंजर कृतिका शुक्ला के निर्देश पर वन विभाग का रेस्क्यू दल थोना ज्ञानपुर गांव भेजा गया, जिसका नेतृत्व डिप्टी रेंजर सुभाष गोयल कर रहे थे। वन अमले ने जैसे ही सूअर की घेराबंदी कर उसे पकड़ने की कार्रवाई शुरू की, उसी दौरान सूअर ने दम तोड़ दिया। रेस्क्यू दल प्रभारी सुभाष गोयल ने बताया कि सूअर की शारीरिक स्थिति पहले से ही काफी बिगड़ी हुई थी और वह ठीक तरह से उठ-बैठ भी नहीं पा रहा था। प्राथमिक तौर पर उसके पागल (रैबिड) होने का अंदेशा जताया जा रहा है। वन विभाग ने मृत सूअर के शव का अटेर में नियमानुसार पोस्टमार्टम कराया है।
इधर, रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान विभागीय लापरवाही और मौके पर रेंजर की अनुपस्थिति को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में नाराजगी देखी जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि रेस्क्यू के तय प्रोटोकॉल का ठीक से पालन नहीं किया गया। मामले में रेंजर कृतिका शुक्ला का पक्ष जानने, पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही सूअर की मौत और बीमारी की असली वजह स्पष्ट होगी।
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