
रामनगर. मैहर जिले की नगर परिषद रामनगर को "आदर्श ग्राम" और "बाणसागर की नगरी" कहा जाता है। यहां से निकली पानी की लाइनें MP, UP, बिहार तक जाती हैं। शासन से अरबों-खरबों का फंड भी आया। लेकिन पहली बारिश में ही रामनगर की असलियत सामने आ गई।
शहर का एक भी मुख्य मार्ग ऐसा नहीं बचा जहां जलभराव और कीचड़ न हो। शासकीय महाविद्यालय से लेकर थाना चौक, प्रस्तावित बस स्टैंड से थानेश्वर मंदिर तक हर जगह जनता कीचड़ में होकर गुजरने को मजबूर है।
5 तस्वीरें, एक ही कहानी - "जलभराव"
1. थाना चौक मुख्य मार्ग - शहर की नब्ज पर पानी

शहर के सबसे व्यस्त थाना चौक के पास मुख्य सड़क पर घुटनों तक पानी भरा है। तस्वीर में नीली ई-रिक्शा कीचड़ से निकल रही है। दुकानों की सीढ़ियों तक पानी पहुंच गया है। यहां रोज हजारों लोग, स्कूल बसें और एंबुलेंस गुजरती हैं। थोड़ी सी बारिश में जाम और हादसे तय हैं।
2. प्रस्तावित बस स्टैंड सतना कैम्प - यात्रियों के लिए दलदल

जिस बस स्टैंड से रामनगर की कनेक्टिविटी बढ़नी है, वही परिसर तालाब बन गया है। दुकानों के सामने गंदा पानी, कचरा और प्लास्टिक भरा है। स्कूटी भी पानी में खड़ी है। नाली जाम होने से सारा पानी यहीं जमा है। यात्री कीचड़ में फिसलकर गिर रहे हैं।
3. शासकीय महाविद्यालय के सामने - शिक्षा का रास्ता कीचड़ में

उच्च शिक्षा के मंदिर तक जाने का रास्ता ही गायब है। कच्ची सड़क पर सिर्फ पानी और घास है। छात्र-छात्राएं जूते हाथ में लेकर कॉलेज पहुंच रहे हैं। छात्राओं को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है।
4. थानेश्वर मंदिर के पास - आस्था के रास्ते में गड्ढे

धार्मिक आस्था का केंद्र थानेश्वर मंदिर तक का मार्ग टूटा-फूटा और कीचड़ से भरा है। श्रद्धालु दर्शन के लिए भी संघर्ष कर रहे हैं। बुजुर्गों के गिरने का डर बना हुआ है।
5. रामनगर-मसमासी मार्ग - हादसों को दावत

इस मार्ग पर बड़े-बड़े गड्ढों में बारिश का पानी भर गया है। ट्रैक्टर और कारें इसी में से निकलने को मजबूर हैं। नाली न होने से डामर उखड़कर गड्ढे बन गए हैं।
जनता के 5 सवाल, प्रशासन से जवाब मांग
1. पैसा कहां गया? बाणसागर परियोजना, जल संसाधन विभाग, सांसद-विधायक निधि की करोड़ों की राशि के बाद भी एक नाली क्यों नहीं बनी?
2. विस्थापन का दर्द: जिस पानी से 3 राज्यों को सप्लाई हो रही है, उसी रामनगर को पीने का साफ पानी और जल निकासी तक नहीं मिली।
3. अधूरा विकास: सड़कें बना दीं, पर नाली नहीं। नतीजा - हर सड़क मानसून में तालाब।
4. सुविधाएं नदारद: 25-30 साल में न तालाब बना, न पार्क, न चरागाह, न सार्वजनिक स्थल।
5. बीमारी का खतरा: हर जगह रुके पानी में मच्छर। डेंगू, मलेरिया और पेट की बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।
रामनगर का "विकास रिपोर्ट कार्ड"
सेक्टर अंक स्थिति
*सड़क-नाली* 2/10 फेल। हर जगह जलभराव
*शिक्षा* 3/10 महाविद्यालय का रास्ता खराब
*स्वास्थ्य* 2/10 जलभराव से बीमारी का खतरा
*परिवहन* 3/10 बस स्टैंड और मुख्य मार्ग जलमग्न
*धार्मिक स्थल* 3/10 मंदिर तक कीचड़ वाला रास्ता
नगरवासियों की मांग
रामनगर के नागरिकों ने एकजुट होकर मांग की है:
1. पूरे शहर में युद्ध स्तर पर नाली और ड्रेनेज सिस्टम बनाया जाए
2. महाविद्यालय, मंदिर, बस स्टैंड और थाना चौक की सड़कों की तत्काल मरम्मत हो
3. बाणसागर फंड के खर्च का सोशल ऑडिट कराया जाए
4. "आदर्श ग्राम" का दर्जा तभी सार्थक होगा जब आखिरी गली तक विकास पहुंचे
स्थानीय लोगों ने कहा है कि अगर 15 दिन में स्थायी समाधान नहीं हुआ तो वे ज्ञापन सौंपकर अपनी आवाज प्रशासन तक पहुंचाएंगे।
सीधा सवाल - जब थाना चौक, महाविद्यालय और मंदिर के सामने ही ये हाल है, तो बाकी रामनगर की क्या स्थिति होगी ,?
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