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तमिलनाडु सरकार ने आर्थिक स्थिति को लेकर जारी किया श्वेत पत्र, राज्य पर 13.18 लाख करोड़ का कर्ज


नई दिल्ली, 17 जून (आईएएनएस)। तमिलनाडु में नई चुनी गई टीवीके सरकार ने राज्य की बिगड़ती आर्थिक स्थिति को लेकर एक श्वेत पत्र जारी किया है। इसमें राज्य की कुल वित्तीय देनदारियां करीब 13.18 लाख करोड़ रुपए बताई गई हैं। इस कदम की कुछ लोगों ने सराहना की है, वहीं कुछ ने सरकार से पूछा है कि राज्य की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए उसकी अपनी क्या योजना है।

नई दिल्ली, 17 जून (आईएएनएस)। तमिलनाडु में नई चुनी गई टीवीके सरकार ने राज्य की बिगड़ती आर्थिक स्थिति को लेकर एक श्वेत पत्र जारी किया है। इसमें राज्य की कुल वित्तीय देनदारियां करीब 13.18 लाख करोड़ रुपए बताई गई हैं। इस कदम की कुछ लोगों ने सराहना की है, वहीं कुछ ने सरकार से पूछा है कि राज्य की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए उसकी अपनी क्या योजना है।

मंगलवार को तमिलनाडु की वित्त मंत्री मैरी विल्सन द्वारा जारी श्वेत पत्र के अनुसार, राज्य पर कुल बकाया कर्ज 13.18 लाख करोड़ रुपए है। इसमें केवल प्रत्यक्ष कर्ज (डायरेक्ट डेट) ही लगभग 10 लाख करोड़ रुपए के करीब पहुंच गया है।

भाजपा ने इस श्वेत पत्र का स्वागत करते हुए कहा कि इससे पिछली सरकारों के खराब प्रशासन और आर्थिक प्रबंधन की असली तस्वीर सामने आई है। साथ ही पार्टी ने विजय सरकार से यह भी पूछा कि राज्य की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए उसकी क्या योजना और रोडमैप है।

भाजपा नेता तमिलिसाई सुंदरराजन ने कहा, "भाजपा शासित राज्यों ने कोविड के बाद भी आर्थिक चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना किया है, फिर तमिलनाडु ऐसा क्यों नहीं कर सका? इसके अलावा, जब सरकार श्वेत पत्र जारी कर रही है, तो उसे यह भी बताना चाहिए कि अर्थव्यवस्था सुधारने के लिए वह कौन से कदम उठाने जा रही है।"

उन्होंने कहा, "सरकार ने महिलाओं को सहायता देने का वादा किया है, जिसके तहत 1.57 करोड़ लाभार्थियों को लगभग 47,000 करोड़ रुपए की जरूरत होगी। इसी तरह किसानों को नकद सहायता देने के लिए करीब 11,910 करोड़ रुपए चाहिए होंगे।"

उन्होंने सवाल उठाया, "जब सरकार को राज्य की आर्थिक स्थिति का पता था, तो उसने इतने बड़े-बड़े वादे क्यों किए? अब इन्हें पूरा कैसे करेगी?"

तमिलनाडु की वित्तीय स्थिति पर यह श्वेत पत्र, पूर्व मुख्यमंत्री एमके. स्टालिन के नेतृत्व वाली सरकार के सत्ता से बाहर होने के बाद जारी किया गया है।

भाजपा नेता नारायणन तिरुपति ने कहा, "तमिलनाडु की आर्थिक स्थिति पहले से ही सभी को पता है। जब डीएमके सत्ता में आई थी, तब राज्य पर लगभग 5 लाख करोड़ रुपए का कर्ज था और सत्ता छोड़ते समय उन्होंने खुद स्वीकार किया था कि यह करीब 10 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। ऐसे में जब आंकड़े पहले से सार्वजनिक हैं, तो श्वेत पत्र जारी करने का उद्देश्य क्या है?"

वहीं, डीएमके ने विजय सरकार के इस श्वेत पत्र की कड़ी आलोचना की है। पार्टी का कहना है कि यह सरकार अपनी चुनावी घोषणाओं और प्रशासनिक विफलताओं से लोगों का ध्यान हटाने की कोशिश कर रही है।

पूर्व वित्त मंत्री थंगम थेनारासु ने सोशल मीडिया पर कहा, "तमिलनाडु की वित्तीय स्थिति को राज्य बजट पेश करते समय पहले ही स्पष्ट और विस्तार से बताया जा चुका है।"

उन्होंने इस श्वेत पत्र को सरकार की चुनावी वादों को पूरा करने में नाकामी छिपाने का एक स्टंट बताया। डीएमके प्रवक्ता टीकेएस एलंगोवन ने कहा, "हमारे पूर्व वित्त मंत्री ने कहा है कि श्वेत पत्र में दिए गए आंकड़े गलत हैं। उन्होंने जल्द ही विस्तृत आंकड़े जारी कर इस सरकार द्वारा जारी श्वेत पत्र की खामियों और गलतियों को उजागर करने की बात कही है।"

--आईएएनएस

एएमटी/एबीएम

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