Office Address

Address Display Here

Phone Number

+91-9876543210

Email Address

info@deshbandhu.co.in

पाकिस्तान, सऊदी और तुर्की का नया रक्षा समझौता, भारत के ल‍िए बढ़ा सकता है रणनीतिक चुनौती : विशेषज्ञ


नई दिल्ली, 7 अगस्त (आईएएनएस)। हाल ही में पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच हस्ताक्षरित 'मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट' (मक्का संयुक्त रक्षा समझौता) क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग के लिहाज से महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

नई दिल्ली, 7 अगस्त (आईएएनएस)। हाल ही में पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच हस्ताक्षरित 'मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट' (मक्का संयुक्त रक्षा समझौता) क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग के लिहाज से महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस समझौते में कहा गया है कि यदि तीनों देशों में से किसी एक पर सशस्त्र हमला होता है, तो उसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। साथ ही रक्षा सहयोग को कई क्षेत्रों में और बढ़ाने का भी प्रावधान किया गया है।

सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता मुख्य रूप से पश्चिम एशिया में तेजी से बदल रहे रणनीतिक हालात का परिणाम है। इसमें ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल की सैन्य कार्रवाई, अमेरिकी ठिकानों पर ईरान की जवाबी कार्रवाई तथा खाड़ी क्षेत्र के ऊर्जा और जल ढांचे की सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताएं शामिल हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस समझौते का मुख्य उद्देश्य अस्थिर होते क्षेत्र में सामूहिक सुरक्षा और प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करना है।

हालांकि, यह समझौता भारत के लिए भी कुछ महत्वपूर्ण सवाल खड़े करता है।

एक विश्लेषक ने कहा, "सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि भविष्य में किसी बड़े सीमा-पार आतंकी हमले के बाद भारत को पाकिस्तान में मौजूद आतंकी ढांचे के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करनी पड़े, तो इस समझौते की पारस्परिक रक्षा धारा की व्याख्या किस तरह की जाएगी।"

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत हमेशा यह स्पष्ट करता रहा है कि आत्मरक्षा के तहत की जाने वाली आतंकवाद-रोधी कार्रवाई किसी संप्रभु देश के खिलाफ आक्रामक कार्रवाई से अलग होती है। ऐसी स्थिति में यह रक्षा प्रावधान कानूनी या राजनीतिक रूप से लागू होगा या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं है। यह पूरी तरह परिस्थितियों, राजनयिक सलाह-मशविरों और समझौते पर हस्ताक्षर करने वाले तीनों देशों की व्याख्या पर निर्भर करेगा।

विश्लेषकों का कहना है कि तुर्की लगातार पाकिस्तान के साथ रक्षा सहयोग बढ़ा रहा है। वहीं, सऊदी अरब के पास पर्याप्त वित्तीय संसाधन हैं, जो अप्रत्यक्ष रूप से पाकिस्तान की सैन्य क्षमता और मजबूती को बढ़ा सकते हैं।

एक विशेषज्ञ के अनुसार, "इन घटनाक्रमों पर नई दिल्ली को स्वाभाविक रूप से करीब से नजर रखनी चाहिए।"

दूसरी ओर, भारत और सऊदी अरब के बीच ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार, निवेश और आतंकवाद-रोधी सहयोग के आधार पर मजबूत और लगातार बढ़ते रणनीतिक संबंध हैं। कई विशेषज्ञों का मानना है कि रियाद को यह स्पष्ट करना चाहिए कि यह समझौता भारत के खिलाफ नहीं है और इससे सभी प्रकार के आतंकवाद के खिलाफ उसकी प्रतिबद्धता कमजोर नहीं पड़ती।

विशेषज्ञों की राय है कि भारत के लिए सही प्रतिक्रिया न तो घबराहट होनी चाहिए और न ही लापरवाही। इसके बजाय भारत को सावधानीपूर्ण कूटनीति, क्षेत्रीय साझेदारों के साथ लगातार संवाद और इस बात पर दृढ़ रुख बनाए रखना चाहिए कि कोई भी सुरक्षा व्यवस्था सीमा-पार आतंकवाद को किसी भी तरह का राजनीतिक संरक्षण नहीं दे सकती।

--आईएएनएस

एवाई/एबीएम

Share:

Leave A Reviews

Related News