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'नीट का दोबारा आयोजन स्थायी समाधान नहीं', राहुल गांधी की 'छात्रों की गूंज' रैली में छात्रा


कोटा, 17 जून (आईएएनएस)। राजस्थान के कोचिंग हब कोटा में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की 'छात्रों की गूंज' रैली में शामिल होने आए कई छात्रों ने कहा कि नीट-यूजी की दोबारा परीक्षा कराना पेपर लीक की घटनाओं पर रोक लगाने का स्थायी समाधान नहीं है। ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सिस्टम और सुरक्षा को मजबूत करने की जरूरत है।

कोटा, 17 जून (आईएएनएस)। राजस्थान के कोचिंग हब कोटा में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की 'छात्रों की गूंज' रैली में शामिल होने आए कई छात्रों ने कहा कि नीट-यूजी की दोबारा परीक्षा कराना पेपर लीक की घटनाओं पर रोक लगाने का स्थायी समाधान नहीं है। ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सिस्टम और सुरक्षा को मजबूत करने की जरूरत है।

आईएएनएस से ​​बात करते हुए उन्होंने परीक्षा के पेपर लीक होने से उम्मीदवारों की मानसिक और शारीरिक सेहत पर पड़ने वाले असर की ओर भी इशारा किया।

3 मई को हुई परीक्षा में कथित गड़बड़ियों के बाद नीट-यूजी 2026 की दोबारा परीक्षा 21 जून को है।

परीक्षा में अगले साल शामिल होने के लिए एलन कोचिंग इंस्टीट्यूट में तैयारी कर रही एक छात्रा ने कहा कि नीट-यूजी की दोबारा परीक्षा न तो कोई कारगर तरीका है और न ही कोई पक्का समाधान। छात्रा ने कहा कि यह बस हमें भरोसा दिलाने का एक तरीका है, लेकिन कोई पक्का समाधान नहीं है। ऐसी दोबारा परीक्षाएं होती रहेंगी, लेकिन कब तक? इस तरह से छात्र भावनात्मक, मानसिक और शारीरिक रूप से थक जाएंगे।

छात्रा ने कहा कि दूसरी परीक्षाओं में भी गड़बड़ियां होती हैं। यह सिर्फ नीट के बारे में नहीं है। चाहे वे कंप्यूटर-बेस्ड हों या ओएमआर-बेस्ड। सुरक्षा में लापरवाही होती है और कंप्यूटर-बेस्ड परीक्षाओं के दौरान छात्रों को सॉफ्टवेयर से जुड़ी तकनीकी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

छात्रा ने शिकायत की कि ऐसी कई दिक्कतें हैं, जिन पर अभी तक ध्यान नहीं दिया गया है। नीट पेपर लीक एक बड़ा मुद्दा बन गया क्योंकि युवाओं ने आवाज उठाई। इसे दोबारा कराया जा रहा है, वरना शायद ऐसा भी नहीं होता।

छात्रा ने आगे कहा कि इस साल उम्मीदवारों को जिन दिक्कतों का सामना करना पड़ा, जिनमें मानसिक तनाव भी शामिल है, वे अगले साल नहीं होनी चाहिए, जब मैं परीक्षा में बैठूंगी। इसीलिए मैं विरोध प्रदर्शन में शामिल होने आई हूं।

इसी तरह की बात कहते हुए, संस्थान की एक अन्य छात्रा ने कहा कि सिस्टम को बेहतर बनाने की जरूरत है। बार-बार पेपर लीक होने से छात्रों की मानसिक सेहत पर असर पड़ता है। ऐसी घटनाओं की वजह से वे तनाव में आ जाते हैं और उनका हौसला टूट जाता है।

छात्रा ने आगे कहा कि सुरक्षा को और भी कड़ा करने की जरूरत है ताकि पेपर लीक होने जैसी घटनाएं दोबारा न हों।

इसके अलावा, एक अन्य छात्रा के मुताबिक, सरकार ऐसी घटनाओं को रोकने में नाकाम रही है और लगभग हर साल पेपर लीक हो रहे हैं। सब-इंस्पेक्टर परीक्षा का पेपर भी कई बार लीक हुआ है। हाई कोर्ट के आदेश के बावजूद, उस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई। जिन लोगों ने गलत तरीके से नौकरी हासिल की, उनके खिलाफ भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

--आईएएनएस

पीएसके/एबीएम

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