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झारखंडः गोड्डा में बदल रही जिंदगी की तस्वीर, गांवों तक पहुंचा इलाज, खेती का बदला तरीका तो बढ़ी कमाई


गोड्डा, 15 जून (आईएएनएस)। गोड्डा जिले के मोतिया गांव की 60 वर्षीय फदमा देवी के लिए कुछ साल पहले तक दुनिया धुंधली हो चुकी थी। मोतियाबिंद के कारण उनकी आंखों की रोशनी लगातार कम हो रही थी, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण इलाज कराना उनके लिए संभव नहीं था। परिवार की सीमित आय में रोजमर्रा का खर्च चलाना ही मुश्किल था। गांव में आयोजित एक नेत्र जांच शिविर में उनकी जांच हुई और बाद में उनका नि:शुल्क ऑपरेशन कराया गया। आज फदमा देवी फिर से सामान्य जीवन जी रही हैं और अपने दैनिक कामकाज खुद कर पा रही हैं।

गोड्डा, 15 जून (आईएएनएस)। गोड्डा जिले के मोतिया गांव की 60 वर्षीय फदमा देवी के लिए कुछ साल पहले तक दुनिया धुंधली हो चुकी थी। मोतियाबिंद के कारण उनकी आंखों की रोशनी लगातार कम हो रही थी, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण इलाज कराना उनके लिए संभव नहीं था। परिवार की सीमित आय में रोजमर्रा का खर्च चलाना ही मुश्किल था। गांव में आयोजित एक नेत्र जांच शिविर में उनकी जांच हुई और बाद में उनका नि:शुल्क ऑपरेशन कराया गया। आज फदमा देवी फिर से सामान्य जीवन जी रही हैं और अपने दैनिक कामकाज खुद कर पा रही हैं।

ऐसी ही कहानी लोबंधा गांव के 80 वर्षीय प्रसादी यादव की है। उम्र के साथ बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं और जोड़ों के दर्द के कारण उनका घर से निकलना मुश्किल हो गया था। जिला मुख्यालय तक इलाज के लिए जाना उनके लिए बड़ी चुनौती था। नियमित स्वास्थ्य परामर्श और दवाइयों की उपलब्धता से उनकी स्थिति में सुधार आया और अब वे पहले की तुलना में अधिक सक्रिय जीवन जी रहे हैं। ये दोनों उदाहरण गोड्डा जिले में स्वास्थ्य और आजीविका के क्षेत्र में चल रही उन पहलों की तस्वीर पेश करते हैं, जिनका असर अब हजारों परिवारों तक पहुंच रहा है।

अदाणी फाउंडेशन और अदाणी पावर गोड्डा की ओर से संचालित कार्यक्रमों के तहत गोड्डा और साहिबगंज के 137 गांवों में चार मोबाइल हेल्थ केयर यूनिट के जरिए स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। वर्ष 2025-26 में इन मोबाइल चिकित्सा इकाइयों के माध्यम से 74,116 मरीजों का इलाज किया गया। इनमें बड़ी संख्या महिलाओं और बुजुर्गों की रही।

स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत बनाने के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों के 108 शिविर आयोजित किए गए, जिनमें 2,415 से अधिक मरीजों को परामर्श, जांच और दवाइयां उपलब्ध कराई गईं। टीबी मरीजों के लिए ‘निक्षय मित्र’ कार्यक्रम के तहत 300 मरीजों को छह महीने तक पोषण किट भी दी गई। स्वास्थ्य के साथ-साथ आजीविका के क्षेत्र में भी बदलाव दिखाई दे रहा है। आठ गांवों के 300 किसानों को मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण और आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई गई, जिसके परिणामस्वरूप 15 हजार किलोग्राम से अधिक मशरूम का उत्पादन हुआ।

कई महिलाओं ने मशरूम से अचार और अन्य उत्पाद बनाकर अतिरिक्त आय का स्रोत विकसित किया। वहीं, 17 गांवों के 700 किसानों को उन्नत बीज उपलब्ध कराए गए, जिससे 5,500 क्विंटल से अधिक सब्जियों का उत्पादन हुआ और किसानों की आय में वृद्धि दर्ज की गई। कौशल विकास के क्षेत्र में भी युवाओं और महिलाओं को अवसर देने की कोशिश की गई है। फिटर, डेटा एंट्री ऑपरेटर और सोलर टेक्नीशियन जैसे कोर्स के माध्यम से युवाओं को रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

इसके अलावा 600 से अधिक महिलाओं को सिलाई और टेलरिंग का प्रशिक्षण देकर स्वरोजगार के लिए तैयार किया गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इन पहलों से न केवल इलाज की सुविधा गांवों के करीब पहुंची है, बल्कि लोगों को अपनी आय बढ़ाने और आत्मनिर्भर बनने का अवसर भी मिला है। स्वास्थ्य, पोषण, खेती और कौशल विकास को एक साथ जोड़ने वाला यह मॉडल गोड्डा के कई परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव की नई कहानी लिख रहा है।

--आईएएनएस

एसएनसी/डीकेपी

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