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हनुमानासन : पैरों, कूल्हों और जांघों की जकड़न करता है दूर, पेल्विक मसल्स के लिए भी खास फायदेमंद


नई दिल्ली, 7 अगस्त (आईएएनएस)। दफ्तर में लगातार डेस्क पर बैठे रहने से कमर में दर्द और पैरों की मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं। योग के अनेक आसनों में से एक हनुमानासन प्रभावी माना जाता है। इस आसन के नियमित अभ्यास से शरीर का निचला भाग मजबूत और लचीला बनता है।

नई दिल्ली, 7 अगस्त (आईएएनएस)। दफ्तर में लगातार डेस्क पर बैठे रहने से कमर में दर्द और पैरों की मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं। योग के अनेक आसनों में से एक हनुमानासन प्रभावी माना जाता है। इस आसन के नियमित अभ्यास से शरीर का निचला भाग मजबूत और लचीला बनता है।

यह आसन हठयोग का अत्यंत प्रभावी और उन्नत श्रेणी का आसन हैं। ऐसी मान्यता है कि इस आसन का नाम भगवान हनुमान के उस विशाल छलांग से लिया गया, जो उन्होंने सीता माता की खोज में लंका जाने के लिए लगाई थी।

आयुष मंत्रालय के अनुसार, हनुमानासन (स्प्लिट्स पोज) शरीर के लचीलेपन और संतुलन को बढ़ाने वाला एक उन्नत आसन है। यह आसन शरीर की लचक बढ़ाने में मदद करता है और खासकर पेल्विक मसल्स को ताकत देता है। यह आसन पैरों, कूल्हों और जांघों की जकड़न को खोलता है और पूरे शरीर में ऊर्जा का संचार करता है। नियमित अभ्यास से न सिर्फ शारीरिक शक्ति बढ़ती है, बल्कि मन में एकाग्रता और धैर्य भी आता है। आइए जानते हैं हनुमानासन करने की सही विधि, फायदे और सावधानियां।

इस आसन को करने से शरीर में रक्त प्रवाह का संचार होता है, जिन लोगों के शरीर में रक्त प्रवाह सही से नहीं होता, वे इसका रोजाना अभ्यास कर सकते हैं। साथ ही, यह पेट की मांसपेशियों को टाइट बनाता है, अतिरिक्त चर्बी को घटाता है, नितंबों और जांघों की चर्बी को कम करने में यह आसन बहुत फायदेमंद है।

हनुमानासन को करने के लिए सबसे पहले जमीन पर घुटनों के बल बैठ जाएं। दाएं पैर को आगे की ओर बढ़ाएं और सीधा रखें, हाथों का सहारा लेकर धीरे-धीरे दाएं पैर को आगे और बाएं पैर को पीछे खिसकाएं। अब शरीर के वजन को हाथों से संभालते हुए कूल्हों को नीचे जमीन की तरफ लाएं। दोनों पैर जमीन पर पूरी तरह सीधे और एक सीध में होने चाहिए। संतुलन बनने पर हथेलियों को छाती के आगे जोड़ लें।

सबसे पहले जमीन पर घुटनों के बल बैठ जाएं। रीढ़ सीधी रखें। दाएं पैर को आगे की ओर सीधा बढ़ाएं। हाथों को जमीन पर टिकाकर सहारा लें। धीरे-धीरे दाएं पैर को आगे और बाएं पैर को पीछे खिसकाएं। शरीर का वजन हाथों पर रखें। अब कूल्हों को धीरे-धीरे नीचे जमीन की तरफ ले जाएं। दोनों पैर जमीन पर पूरी तरह सीधे और एक सीध में हों। जब संतुलन बन जाए तो हाथों को छाती के सामने नमस्कार मुद्रा में जोड़ लें। 10-15 सेकंड तक इसी स्थिति में रहें।

जांघ या घुटने में चोट होने पर इसे न करें। जबरदस्ती या झटके के साथ पैर फैलाने से बचें। शुरुआती लोग अभ्यास के लिए योगा ब्लॉक या तकिए का सहारा लें।

--आईएएनएस

एनएस/एएस

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