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देवास: शिप्रा बायपास रेलवे ब्रिज पर अनियंत्रित कार ने बाइक को मारी टक्कर, 2 की मौके पर मौत


देवास। मध्य प्रदेश के देवास जिले में शनिवार सुबह एक भीषण और हृदयविदारक सड़क हादसा सामने आया है। शिप्रा बायपास स्थित रूपाखेड़ी के समीप बने रेलवे ब्रिज पर एक तेज रफ्तार अनियंत्रित कार ने सामने से आ रही बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। इस दर्दनाक हादसे में मोटरसाइकिल सवार दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक अन्य युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना से आक्रोशित स्थानीय ग्रामीणों ने प्रशासनिक ढिलाई, एंबुलेंस के समय पर न पहुंचने और सड़क की तकनीकी खामियों का आरोप लगाते हुए करीब दो घंटे तक मुख्य मार्ग पर चक्काजाम कर दिया। बाद में पुलिस, प्रशासनिक अधिकारियों और स्थानीय विधायक की समझाइश व कार्रवाई के आश्वासन के बाद जाम खोला जा सका।

काम पर जा रहे थे तीनों मजदूर, डिवाइडर कूदकर दूसरी लेन में घुसी कार

प्राप्त जानकारी के अनुसार, नायता पुवाल्डा गांव के निवासी हैदर (40), अंसार और इमरान शनिवार सुबह अपनी बाइक पर सवार होकर इंदौर में काम के लिए निकले थे। ये तीनों युवक मोटर (बोरवेल और पानी की मोटर) निकालने और सुधारने का कार्य करते थे। सुबह करीब 8:30 बजे जैसे ही वे रूपाखेड़ी रेलवे ब्रिज पर पहुंचे, तभी इंदौर की ओर से आ रही एक तेज रफ्तार कार अचानक अनियंत्रित हो गई।

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि रेलवे ब्रिज पर सड़क की सतह अत्यधिक ऊंची-नीची और उबड़-खाबड़ है, जिसके कारण तेज गति से आ रही कार असंतुलित हो गई। करीब 100 फीट तक बेकाबू दौड़ने के बाद कार बीच के डिवाइडर को लांघते हुए दूसरी लेन (रॉन्ग साइड) में घुस गई और सामने से आ रही इन युवकों की बाइक को अपनी चपेट में ले लिया। टक्कर इतनी भीषण थी कि हैदर हवा में उछलकर ब्रिज से लगभग 50 फीट नीचे जा गिरे, जिससे उनकी तत्काल मौत हो गई। वहीं, अंसार और इमरान के एक-एक पैर कटकर नीचे जा गिरे। अंसार ने भी मौके पर ही दम तोड़ दिया, जबकि इमरान को अत्यंत नाजुक हालत में प्राथमिक उपचार के बाद तुरंत इंदौर रेफर किया गया है।

राहत कार्य में देरी पर भड़का आक्रोश, निजी वाहनों से भेजे गए शव

हादसे की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण और सामाजिक कार्यकर्ता मौके पर एकत्र हो गए। ग्रामीणों का आरोप था कि दुर्घटना के बाद पुलिस और 108 एंबुलेंस को सूचना दी गई थी, लेकिन आपातकालीन सेवाएं समय पर मौके पर नहीं पहुंच सकीं। इसके चलते ग्रामीणों को खुद ही आगे आकर घायलों और शवों को निजी वाहनों और ट्रैक्टर-ट्रॉली की मदद से जिला अस्पताल भिजवाना पड़ा।

प्रशासनिक लेती-लतीफी से नाराज ग्रामीणों ने रेलवे ब्रिज पर ही चक्काजाम कर दिया। देखते ही देखते सड़क के दोनों तरफ कई किलोमीटर तक वाहनों का लंबा जाम लग गया और यात्री बसें व कमर्शियल गाड़ियां फंस गईं।

दो घंटे की मशक्कत और विधायक की समझाइश के बाद खुला जाम

चक्काजाम और हंगामे की सूचना मिलते ही एसडीएम अभिषेक शर्मा, ट्रैफिक डीएसपी और सीएसपी सुमित अग्रवाल भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने ग्रामीणों को शांत करने का प्रयास किया, लेकिन वे सड़क निर्माण की जांच और तत्काल सुधार की मांग पर अड़े रहे। इसके बाद स्थानीय विधायक मनोज चौधरी ने मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों से सीधी चर्चा की। विधायक ने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए सड़क की खामियों की उच्च स्तरीय जांच और जिम्मेदार निर्माण एजेंसी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का ठोस आश्वासन दिया। इसके बाद करीब दो घंटे से जारी चक्काजाम समाप्त हुआ और यातायात बहाल कराया जा सका।

पुल की इंजीनियरिंग और गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल

इस हादसे ने एक बार फिर शिप्रा बायपास स्थित इस रेलवे ब्रिज के निर्माण की गुणवत्ता को कटघरे में खड़ा कर दिया है। स्थानीय निवासियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब यहां कोई बड़ा हादसा हुआ हो। ब्रिज की सड़क समतल नहीं होने के कारण तेज रफ्तार वाहन अक्सर यहां आकर उछल जाते हैं और चालकों का नियंत्रण खो जाता है। ग्रामीणों ने मांग की है कि इस ब्लैक स्पॉट को तुरंत दुरुस्त किया जाए ताकि भविष्य में किसी और मासूम की जान न जाए।

सीएसपी का वक्तव्य: "सड़क दुर्घटना में दो लोगों की असमय मृत्यु हुई है और एक घायल का इलाज जारी है। ग्रामीणों ने सड़क की डिजाइन और तकनीकी खामियों के संबंध में शिकायत दर्ज कराई है। इस पूरे विषय को सड़क सुरक्षा समिति की आगामी बैठक में प्रमुखता से रखा जाएगा और तकनीकी जांच के आधार पर जिम्मेदार एजेंसी को आवश्यक सुधार के लिए पत्र भेजा जाएगा।"

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