
देवास जिले के कमलापुर क्षेत्र में वन भूमि से अवैध कब्जा हटाने पहुंची वन विभाग की टीम पर ग्रामीणों ने जानलेवा हमला कर दिया। भीलआमला गांव में शनिवार को जब विभाग के बुलडोजर ने अतिक्रमण हटाना शुरू किया, तो देखते ही देखते करीब 100 से ज्यादा लोगों की भीड़ ने अमले को चारों ओर से घेर लिया और पथराव शुरू कर दिया। इस हिंसक झड़प में वन विभाग के आधा दर्जन अधिकारी-कर्मचारी गंभीर रूप से घायल हो गए हैं।
शनिवार सुबह करीब 11 बजे वन विभाग का अमला पुलिस बल के साथ जिनानी रेंज के अंतर्गत आने वाले भीलआमला गांव पहुंचा था। प्रशासन की योजना वन भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की थी। जैसे ही बुलडोजर चलाकर अवैध कब्जों को ढहाने की कार्रवाई शुरू हुई, स्थानीय लोग उग्र हो गए। देखते ही देखते भीड़ ने अमले पर पत्थरों की बौछार कर दी।
इस अचानक हुए हमले से वन विभाग के कर्मचारियों में अफरा-तफरी मच गई। जान बचाने के लिए कर्मचारी इधर-उधर भागने लगे, लेकिन कई लोग पथराव की चपेट में आ गए। भीड़ यहीं नहीं रुकी, बल्कि उन्होंने मौके पर खड़े बुलडोजर और विभाग के अन्य सरकारी वाहनों में जमकर तोड़फोड़ की। इस दौरान मौजूद पुलिस बल ने जैसे-तैसे घायलों को भीड़ के बीच से सुरक्षित निकाला और अमरपुरा के निजी अस्पताल में भर्ती कराया।

इस घटना में घायल होने वाले कर्मचारियों में मोहन पंचोनिया, ज्योति जाट, कमल परमार, कमल राणा, देवकरण मालवीय और सूरज ढाढे शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार, इनमें से कुछ को गंभीर चोटें आई हैं। हैरानी की बात यह है कि घायल कर्मचारियों में वन विभाग की महिला कर्मचारी भी शामिल हैं, जो अपनी ड्यूटी का निर्वहन कर रही थीं।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। कमलापुर थाना प्रभारी सर्जन सिंह मीणा ने बताया कि स्थिति अब नियंत्रण में है और घायलों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा:
"हमने घटना के बारे में वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत करा दिया है। जिन लोगों ने सरकारी काम में बाधा डाली और बलवा किया, उन सभी की पहचान की जा रही है। जल्द ही सभी हमलावरों के खिलाफ सख्त धाराओं में प्रकरण दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू की जाएगी।"
इस हिंसक घटना के बाद क्षेत्र में भारी तनाव का माहौल है। प्रशासनिक अमला अब इस बात की जांच कर रहा है कि अचानक इतनी बड़ी संख्या में भीड़ कैसे जुट गई और इसके पीछे किन लोगों का हाथ है। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वे नियम के अनुसार सरकारी जमीन खाली करा रहे थे, जिसे लेकर पहले भी कई बार नोटिस दिए गए थे, लेकिन ग्रामीणों ने सहयोग करने के बजाय हमला करना उचित समझा। इस मामले ने देवास जिले में सरकारी जमीन पर अतिक्रमण और सुरक्षा के दावों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
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