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अहमदाबाद: जुआ रैकेट का भंडाफोड़, सीसीटीवी की निगरानी में हो रही थी सट्टेबाजी


अहमदाबाद, 7 अगस्त (आईएएनएस) गुजरात पुलिस की राज्य निगरानी प्रकोष्ठ (एसएमसी) द्वारा अहमदाबाद के मनपसंद जिमखाना पर छापेमारी और हाल के वर्षों में राज्य की सबसे बड़ी जुआ विरोधी कार्रवाई में 187 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। जांचकर्ताओं का कहना है कि इस अभियान से न केवल एक अवैध कार्ड रूम का खुलासा हुआ है बल्कि नकदी को छिपाकर रखने, प्रवर्तन अधिकारियों को भ्रमित करने और इस गतिविधि को एक हानिरहित क्लब मनोरंजन के रूप में प्रस्तुत करने के लिए बनाई गई एक सुनियोजित प्रणाली का भी पता चला है।

अहमदाबाद, 7 अगस्त (आईएएनएस) गुजरात पुलिस की राज्य निगरानी प्रकोष्ठ (एसएमसी) द्वारा अहमदाबाद के मनपसंद जिमखाना पर छापेमारी और हाल के वर्षों में राज्य की सबसे बड़ी जुआ विरोधी कार्रवाई में 187 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। जांचकर्ताओं का कहना है कि इस अभियान से न केवल एक अवैध कार्ड रूम का खुलासा हुआ है बल्कि नकदी को छिपाकर रखने, प्रवर्तन अधिकारियों को भ्रमित करने और इस गतिविधि को एक हानिरहित क्लब मनोरंजन के रूप में प्रस्तुत करने के लिए बनाई गई एक सुनियोजित प्रणाली का भी पता चला है।

पुष्ट खुफिया जानकारी के बाद रविवार को की गई यह छापेमारी, दरियापुर परिसर में पांच वर्षों में की गई तीसरी बड़ी पुलिस कार्रवाई थी।

एसएमसी अधिकारियों ने 2021 में उसी स्थान पर छापा मारा था, जिसमें 183 लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जबकि अहमदाबाद क्राइम ब्रांच 2023 में वापस आई और जांचकर्ताओं द्वारा यह कहे जाने के बाद कि क्लब ने फिर से परिचालन शुरू कर दिया है, 27 लोगों को गिरफ्तार किया।

अधिकारियों का कहना है कि इस अभियान में कामकाज का एक और भी अधिक संगठित मॉडल सामने आया है। जांच से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, सूचना मिलने के तुरंत बाद एसएमसी ने कोई कार्रवाई नहीं की। सूचना की पुष्टि करने में लगभग 25 से 30 मिनट लगे, जिसके बाद अभियान के लिए लगभग 20 से 25 कर्मियों की पांच टीमें गठित की गईं।

रविवार शाम का समय जानबूझकर चुना गया, क्योंकि यह इलाका आमतौर पर भीड़भाड़ वाला होता है, जिससे अधिकारियों को एक समन्वित पुलिस दल के रूप में दिखने के बजाय आसपास के माहौल में घुलमिल जाने का मौका मिला।

एक अधिकारी ने आईएएनएस को बताया, "टीमें भीड़भाड़ वाली गलियों से अलग-अलग आगे बढ़ीं और फिर एक साथ परिसर में पहुंचकर अंदर मौजूद लोगों को भागने से रोक दिया।"

क्लब का लेआउट ही कथित जुआ संचालन की योजना को दर्शाता था। जांचकर्ताओं ने कहा कि जिमखाना के मुख्य द्वार से जुआ गतिविधि दिखाई नहीं देती थी। खिलाड़ियों को पहली मंजिल के हॉल तक सीढ़ियां चढ़नी पड़ीं, जहां अधिकारियों ने कमरे में फैली लगभग 20 से 22 मेजें देखीं, जिन पर लोग सक्रिय रूप से ताश खेल रहे थे।

परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगे हुए थे, जिनमें क्लब की ओर जाने वाली लेन की निगरानी करने वाले कैमरे भी शामिल थे, जिससे अंदर मौजूद लोगों को आने-जाने वाले आगंतुकों पर नजर रखने में मदद मिलती थी। पुलिस का कहना है कि सबसे चौंकाने वाली बात ताश के खेल नहीं थे बल्कि उनके पीछे चल रही वित्तीय प्रणाली थी।

आईएएनएस को पता चला है कि खिलाड़ी टेबल पर नकदी लाने के बजाय कथित तौर पर भूतल पर स्थित एक कार्यालय में पैसे जमा करते थे। इसके बाद उन्हें हस्तलिखित पर्चियां (रसीद) जारी की जाती थीं, जिन पर वास्तविक राशि के बजाय कोडित मूल्य लिखे होते थे।

उदाहरण के लिए 5,000 रुपये जमा करने वाले खिलाड़ी को "50" अंकित एक पर्ची मिलेगी, जिसमें जानबूझकर दो शून्य छोड़ दिए गए होंगे। पर्ची को ऊपर ले जाया जाएगा, जहां मेज पर बैठा एक कर्मचारी खिलाड़ी का नाम और सांकेतिक राशि दर्ज करने के लिए एक मुद्रित रजिस्टर रखता था।

अधिकारियों ने बताया कि प्रत्येक टेबल पर छह खिलाड़ी बैठते थे और हर खेल में एक विजेता होता था। आरोप है कि टेबल संचालक को हर खेल से 300 रुपये मिलते थे। खिलाड़ी लगातार आते-जाते रहते थे और खेल के बाद रिकॉर्ड अपडेट होते रहते थे।

उदाहरण के लिए अगर कोई खिलाड़ी आठवें दौर के बाद खेल छोड़ देता, तो नए प्रतिभागी का प्रवेश नौवें दौर से शुरू होता। जांचकर्ताओं ने बताया कि शाम भर खातों की गिनती अपडेट होती रही और जीत-हार को नकद के बजाय सांकेतिक आंकड़ों में दर्शाया गया।

जांचकर्ताओं का मानना ​​है कि पूरी व्यवस्था इस तरह से बनाई गई थी, ताकि झूठ को आसानी से नकारा जा सके। अगर पुलिस अंदर आती, तो खिलाड़ी यह दावा कर सकते थे कि वे केवल क्लब के सदस्य थे और मनोरंजन के लिए ताश खेल रहे थे, क्योंकि मेजों पर कोई नकदी दिखाई नहीं दे रही थी।

अधिकारियों ने बताया कि इसी वजह से 187 लोगों की मौजूदगी के बावजूद केवल लगभग 33 लाख रुपये नकद बरामद किए जा सके। उनका मानना ​​है कि यह राशि केवल तत्काल उपलब्ध नकदी थी, न कि सट्टेबाजी का वास्तविक मूल्य।

जांचकर्ताओं का आरोप है कि धन के लेन-देन का बड़ा हिस्सा भौतिक मुद्रा से परे अन्य स्रोतों से होकर गुजरा होगा। अब जांच का दायरा बढ़ाकर यूपीआई लेनदेन और बैंक खातों की भी जांच की जा रही है, ताकि इस पूरे वित्तीय अभियान का सटीक आकलन किया जा सके।

अधिकारियों ने कहा कि जुआ कानूनों के तहत नियमित जमानत पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय मुख्य संचालक और कर्मचारियों सहित नौ आरोपियों के लिए पुलिस रिमांड मांगने का एक उद्देश्य डिजिटल भुगतानों का पता लगाना और उन खातों की पहचान करना था जिनका कथित तौर पर सट्टेबाजी की आय को संभालने के लिए इस्तेमाल किया गया था।

गौरतलब है कि बरामद नकदी जुए की मेजों पर नहीं मिली। अधिकारियों ने बताया कि पंचनामा के दौरान संदिग्धों से पूछताछ करने के बाद उन्हें छिपी हुई नकदी का पता लगाने के लिए जुए के क्षेत्र से बाहर तलाशी लेनी पड़ी।

--आईएएनएस

एसएचके/पीएम

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